राजिम कुंभ कल्प में दिखेगा 12 ज्योतिर्लिंगों का दिव्य स्वरूप

धर्म नगरी राजिम के त्रिवेणी संगम में 1 फरवरी से कुंभ कल्प 2026 का भव्य आयोजन हो रहा है। इस वर्ष राजिम कुंभ कल्प 2026 का थीम 12 ज्योतिर्लिंग पर आधारित है, जहां सभी ज्योतिर्लिंग का दिव्य स्वरूप देखने को मिलेगा। आइए जानते है भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग और उनकी विशेषताओं के बारे में… सोमनाथ (गुजरात) सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात के प्रभास पाटन में अरब सागर के तट पर स्थित है और इसे पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति के शाप से मुक्ति पाने के लिए यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें रोगमुक्त किया और इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। इतिहास में इस मंदिर को कई बार आक्रमणों से नष्ट किया गया, फिर भी हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ, जो इसकी आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है। मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश) मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव और माता पार्वती दोनों की संयुक्त उपासना का स्थल है, जहाँ शिव मल्लिकार्जुन और पार्वती भ्रामरांबा के नाम से पूजे जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, अपने पुत्र कार्तिकेय को प्रसन्न करने के लिए शिव-पार्वती यहां निवास करने लगे थे। यह स्थान शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग का दुर्लभ संगम है, जिससे इसका धार्मिक महत्व अत्यंत बढ़ जाता है। महाकालेश्वर (उज्जैन) महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में स्थित है और यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। कथा के अनुसार उज्जैन को असुरों से बचाने के लिए भगवान शिव ने महाकाल रूप धारण किया था। यहां शिव को काल के भी काल यानी महाकाल माना जाता है। इस मंदिर की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें शिवलिंग पर भस्म चढ़ाई जाती है, जो जीवन की नश्वरता का प्रतीक है। ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के मांधाता द्वीप पर स्थित है। यह द्वीप ‘ॐ’ के आकार का माना जाता है, इसलिए इस स्थान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार विंध्य पर्वत की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां ओंकारेश्वर के रूप में प्रकट हुए। यहां ओंकारेश्वर और अमलेश्वर नामक दो शिवलिंग हैं, जिन्हें मिलकर ज्योतिर्लिंग माना जाता है। केदारनाथ (उत्तराखंड) केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड के हिमालय पर्वत क्षेत्र में स्थित है। महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज में यहां आए थे। भगवान शिव बैल का रूप धारण कर अंतर्धान हो गए और उनका पृष्ठभाग यहां प्रकट हुआ, जिसकी पूजा केदारनाथ में की जाती है। यह पंचकेदार में सबसे प्रमुख स्थान है और अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। भीमाशंकर (महाराष्ट्र) भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार असुर भीम के अत्याचारों से ऋषियों की रक्षा के लिए भगवान शिव यहां प्रकट हुए और उसका वध किया। इस स्थान से भीमा नदी का उद्गम माना जाता है। घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह मंदिर आध्यात्मिक शांति का विशेष केंद्र है। काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश) काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर में स्थित है, जिसे शिव की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां मृत्यु होने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव स्वयं काशी में निवास करते हैं। यह ज्योतिर्लिंग ज्ञानवापी कुंड के निकट स्थित है और हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र) त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग इसलिए विशिष्ट है क्योंकि यहां के शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश – तीनों देवताओं का प्रतीकात्मक स्वरूप है। पौराणिक कथा के अनुसार गौतम ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां प्रकट हुए। इसी स्थान से पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम होता है। वैद्यनाथ (झारखंड) वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। कथा के अनुसार रावण भगवान शिव को लंका ले जाना चाहता था, पर भगवान शिव यहीं ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हो गए। यहां भगवान शिव को वैद्य यानी चिकित्सक के रूप में पूजा जाता है, जो भक्तों के रोग दूर करते हैं। श्रावण मास में यहां विशाल कांवड़ यात्रा होती है। नागेश्वर (गुजरात) नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात में द्वारका के निकट स्थित है। शिवपुराण के अनुसार एक भक्त को नागों के आतंक से बचाने के लिए भगवान शिव यहां नागेश्वर रूप में प्रकट हुए। यह ज्योतिर्लिंग भय, विष और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। यहां स्थापित विशाल शिव प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है। रामेश्वरम (तमिलनाडु) रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु में स्थित है। लंका पर चढ़ाई से पूर्व भगवान राम ने ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना की और पूजा की। यह चार धामों में से एक है। मंदिर के 22 तीर्थ कुंड और लंबा गलियारा इसे विशेष बनाते हैं। घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफाओं के पास स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार घृष्णा नामक एक परम शिव भक्त महिला की अटूट श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां प्रकट हुए। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम माना जाता है और भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र स्थान है।
छत्तीसगढ़ का महाकुंभ…संगम से 750 मीटर दूर भरेगा राजिम कुंभ कल्प मेला

Rajim Kumbh Mela Festival 2025 : छत्तीसगढ़ में होने वाले राजिम कुंभ महोत्सव मेले का स्थान बदलने जा रहा है। ऐसा करीब 20 साल बाद होगा। राजिम कुंभ कल्प का आयोजन 12 फरवरी से 26 फरवरी तक होगा। जिला प्रशासन की ओर से मिली अनाधिकारिक जानकारी के अनुसार मेला इस बार संगम स्थल नहीं, बल्कि वहां से 750 मीटर दूर लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच लगाया जाएगा। लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच अस्थाई रोड बनेगी लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच अस्थाई सड़क (रेत–मुरूम) जिला प्रशासन बनाएगा। इसके अलावा यात्रियों के लिए गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था भी की जाएगी। गरियाबंद जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने तैयारियां शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार राजिम कुंभ की तैयारियों को लेकर पिछले दिनों सीएम विष्णुदेव साय ने बैठक ली थी। इस दौरान नए स्थल का प्रस्ताव सीएम साय को दिखाया गया। सीएम साय ने भीड़ और व्यवस्थाओं को देखकर नई जगह पर सहमति दी। भूपेश सरकार के दौरान तय हुई थी यह जगह बैठक में सीएम ने श्रद्धालुओं के आने-जाने की व्यवस्था, सुरक्षा संबंधी उपाय और स्वच्छता के लिए विशेष ध्यान देने को कहा। बताया जा रहा है कि लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच मेला लगाने के लिए जगह निर्धारित हुई है। इसकी मार्किंग भूपेश सरकार के कार्यकाल के दौरान 2021 में हुए थी। उसी साल यानी 2021 में यहां पर मेला लगाने का निर्देश भी जारी किया गया था, लेकिन तैयारियां पूरी नहीं हो पाने की वजह से इसको टाल दिया गया था। राजिम कुंभ महोत्सव का स्थान क्यों बदला जा रहा है ? राजिम कुंभ महोत्सव का स्थान 20 साल बाद बदलने का निर्णय लिया गया है। इस बार मेला संगम स्थल पर नहीं, बल्कि संगम से 750 मीटर दूर लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच आयोजित किया जाएगा। यह निर्णय यात्रा की बेहतर व्यवस्था और स्थान की उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। राजिम कुंभ महोत्सव के नए स्थल में किस तरह की व्यवस्था की जाएगी ? राजिम कुंभ महोत्सव के नए स्थल लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच अस्थाई सड़क बनाई जाएगी। इस सड़क का निर्माण रेत और मुरूम से किया जाएगा। इसके अलावा यात्रियों के लिए गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था भी की जाएगी। गरियाबंद जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने इन तैयारियों को शुरू कर दिया है। राजिम कुंभ महोत्सव के नए स्थल को लेकर कब और किसने निर्णय लिया था ? राजिम कुंभ महोत्सव के नए स्थल का निर्धारण भूपेश सरकार के कार्यकाल के दौरान 2021 में किया गया था। उस समय सीएम भूपेश बघेल ने बैठक में इस स्थल की मार्किंग की थी और यहां मेला आयोजित करने का निर्देश भी जारी किया था, हालांकि तैयारियां पूरी नहीं हो पाई थीं और आयोजन को टाल दिया गया था।
Rajim Kumbh Mela: इस बार 52 एकड़ क्षेत्र में होगा भव्य आयोजन

रायपुर: Rajim Kumbh Mela 2025 Date छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में प्रसिद्ध राजिम में अगामी माह के 12 से 26 फरवरी तक त्रिवेणी संगम में राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन किया जाएगा। राजिम कुंभ के भव्य आयोजन नये मेला स्थल में होगा। इसके लिए जोर-शोर से तैयारियां शुरू कर दी गई है। राजिम कुंभ के आयोजन को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस संबंध में आज हुई बैठक में राजिम विधायक रोहित साहू, बैठक में पूर्व सांसद चंदूलाल साहू, पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय, रायपुर संभाग के आयुक्त महादेव कावरे, गरियाबंद कलेक्टर दीपक अग्रवाल सहित धमतरीं, महासमुंद एवं रायपुर और गरियाबंद जिले के वरिष्ठ अधिकारी, उप संचालक संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग प्रतापचंद पारख सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। Rajim Kumbh Mela 2025 Date बैठक में बताया गया कि आगामी माह में होने वाले कुम्भ कल्प आयोजन लगभग 52 एकड़ क्षेत्र में फैले नया मेला स्थल में होगा। नया मेला स्थल में श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। राजिम कुंभ आयोजन स्थल में व्यवस्थित रूप से दुकानों और विभागीय स्टॉल के साथ-साथ मीना बाजार भी लगाए जाएंगे। यहां आने वाले लोगों की सुविधा के लिए पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा हेलीपैड भी बनाया जाएगा। मेला स्थल को जोड़ने बनेंगी सड़क – बैठक में संभाग आयुक्त कावरे ने बताया कि राजिम मेला 12 से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित की जाएगी। गंगा आरती स्थल से नए मेला स्थल तक नदी किनारे कनेक्टिंग रोड का निर्माण किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं के आने-जाने में आसानी होगी। इसके लिए उन्होंने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को आवश्यक कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही घाट निर्माण, मरम्मत एवं आसपास साफ सफाई भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संत समागम एवं गंगा आरती होगा पुराने स्थल में -बैठक में बताया गया कि पुराने स्थल में केवल संत समागम एवं गंगा आरती का आयोजन होगा। इसके अलावा सभी आयोजन एवं गतिविधियां नए मेला स्थल में आयोजित की जाएगी। पुराने स्थल पर कोई भी अस्थाई दुकान लगाने की अनुमति नहीं होगी। सभी अस्थाई दुकान नई जगह पर लगाई जाएगी। संभाग आयुक्त कावरे ने नए स्थल पर लगने वाले मीना बाजार एवं पार्किंग स्थल के लिए टेंडर प्रक्रिया के लिए जरूरी कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुकानों का आबंटन एसडीएम की अध्यक्षता में गठित समिति के द्वारा की जाएगी। इसके लिए भी तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए। विभागों को सौंप गए दयित्व- राजिम कुंभ कल्प की तैयारी के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पेयजल आपूर्ति, अस्थाई शौचालय निर्माण, पाइपलाइन एवं पानी टंकी की तैयारी समय में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को अस्थाई अस्पताल सहित पर्याप्त मात्रा में एंबुलेंस एवं अन्य मेडिकल सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार विद्युत विभाग को लाइटिंग की व्यवस्था, पुलों पर लाइटिंग के साथ सजावट, मेला स्थल में टावर लाइट एवं पार्किंग स्थल में लाइट आदि की व्यवस्था के निर्देश दिए गए। वन विभाग को बांस बल्ली की व्यवस्था, जलाऊ लकड़ी, साधुओं के लिए कुटिया निर्माण के लिए घास की व्यवस्था के निर्देश दिए गए। खाद्य विभाग को नया मेला स्थल में पर्याप्त संख्या में दाल भात केंद्र खोलने खोलने के निर्देश दिए गए। पुलिस विभाग को सुरक्षा के पर्याप्त व्यवस्था, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम एवं फायर ब्रिगेड आदि की व्यवस्था के लिए निर्देश दिए गए। नगरीय प्रशासन विभाग को साफ सफाई, कचरा निष्पादन, डस्टबिन की पर्याप्त संख्या सहित मंदिर एवं धार्मिक स्थलों का रंग रोगन एवं साफ सफाई के निर्देश दिए गए।
Rajim Kumbh: इस बार अद्भुत होगा राजिम कुंभ कल्प, सीएम ने अधिकारियों को दिए खास निर्देश

रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में प्रसिद्ध राजिम में 12 फरवरी से 26 फरवरी 2025 तक कुंभ कल्प का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष यह अद्भुत धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन 52 एकड़ के नए प्रस्तावित मेला स्थल में संपन्न होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को राजिम कुंभ कल्प के तैयारियों के संबंध में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने शाही स्नान, गंगा आरती, संत समागम समेत कुंभ कल्प के प्रमुख आयोजनों और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। सीएम ने कहा अद्भुत होगा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प 2025 धर्म, आस्था और संस्कृति का अद्भुत समागम होगा और यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को प्रदर्शित करने का भी सुंदर माध्यम है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि श्रद्धालुओं को यहां अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त हो और यह आयोजन हमारी गौरवशाली विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाएं। सीएम ने अधिकारियों के दिए निर्देश सीएम साय ने राजिम कुंभ कल्प के आयोजन में शामिल समस्त विभागों और प्रशासनिक अमले को आपस में समन्वय स्थापित कर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं के आवागमन की व्यवस्था, सुरक्षा संबंधी उपाय और स्वच्छता के लिए विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि “हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस आयोजन को सफल बनाएं और छत्तीसगढ़ की पहचान के रूप में इसे स्थापित करें। उन्होंने 12 फरवरी को आयोजित माघी पुन्नी स्नान, 21 फरवरी जानकी जयंती के अवसर पर संत समागम और 26 फरवरी को होने वाले शाही स्नान की तैयारी पर विशेष ध्यान देने को कहा। राजिम में होंगे विशेष आयोजन 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजिम कुंभ कल्प का शुभारंभ होगा और 26 फरवरी महाशिवरात्रि को इसका समापन होगा। राजिम कुंभ कल्प पैरी, महानदी और सोंढूर नदी के संगम पर आयोजित होगा। राजिम कुंभ कल्प के संपूर्ण आयोजन के लिए पर्यटन विभाग को नोडल बनाया गया है। 15 दिनों तक चलने वाले इस कुंभ कल्प में पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी साधु संतों का विराट समागम होगा। माघी पुन्नी स्नान, शाही स्नान, जानकी जयंती के अवसर पर संत समागम विशेष रूप से आयोजित होगा। प्रतिदिन सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन, मेला, मड़ई, मीना बाजार और विभागीय प्रदर्शनी भी कुंभ कल्प का विशेष आकर्षण के रूप में शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ कल्प का आयोजन 12 फरवरी से 26 फरवरी तक

राजिम: छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ कल्प का आयोजन 12 फरवरी से 26 फरवरी तक होने जा रहा है. इस बार राजिम कुंभ महोत्सव का मेला स्थल बदला जाएगा. जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार मेला स्थल अब संगम स्थल में नहीं, बल्कि वहां से 750 मीटर दूर लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच लगेगा. राजिम कुंभ मेला भारत के आदिवासियों के लिए महत्वपूर्ण मेला रहता है. माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक पंद्रह दिनों का मेला लगता है. कहां लगता है राजिम कुंभ मेला : यह मेला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 45 किलोमीटर दूर सोंढूर, पैरी और महानदी नदी के त्रिवेणी संगम पर लगता है. इस मेले में छत्तीसगढ़ को देशभर में धर्म, कला और संस्कृति की त्रिवेणी के रूप में ख्यात कर दिया है और एक नई पहचान भी दी है. सच कहें तो अनादि काल से छत्तीसगढ़ियों के विश्वास और पवित्रता का दूसरा नाम है राजिम-कुंभ. कहते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य के राजिम क्षेत्र राजिम माता के त्याग की कथा प्रचलित है और भगवान कुलेश्वर महादेव का आशीर्वाद इस क्षेत्र को प्राप्त है. दोनों ही कारणों से राजिम मेला आयोजित होता है. छत्तीसगढ़ का प्रयाग छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाला राजिम धर्म, अध्यात्म, परंपरा और संस्कृति का संगम है. राजिम में तीन नदियों का संगम है, लिहाजा इसे भी त्रिवेणी संगम के नाम से लोग पुकारते हैं. राजिम कुंभ कल्प का आगाज शनिवार को त्रिवेणी संगम में हो चुका है. माघ पूर्णिमा से 15 दिन तक मेला लगता है.
राजिम कुंभ कल्प 2025: इस साल नए मेला स्थल पर होगा भव्य आयोजन, तैयारियां जोरों पर, 12 फरवरी से शुरू

छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहे जाने वाला राजिम में कुंभ मेला आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। इस साल यह आयोजन 12 से 26 फरवरी तक चलेगा। साथ ही मेला स्थल भी दूसरा रहेगा। यह कुंभ कल्प माघ पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक आयोजित होता है, जहां देशभर से संत-महात्मा, श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है, जिसे छत्तीसगढ़ का प्रयागराज भी कहा जाता है। राजिम कुंभ कल्प न केवल धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। इस आयोजन में शाही स्नान, संत समागम, प्रवचन, गंगा आरती और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजिम कुंभ कल्प 2025 में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तत्परता के साथ तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है, जिससे यह आयोजन ऐतिहासिक और भव्य रूप में संपन्न हो सके। इस साल नए मेला स्थल पर यह आयोजन किया जाएगा। मेलार्थियों के लिए समुचित सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इस लेकर राजिम सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें रायपुर संभागायुक्त महादेव कावरे, पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य, गरियाबंद कलेक्टर दीपक अग्रवाल सहित धमतरी और रायपुर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के बाद अधिकारियों ने नए मेला स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में संभागायुक्त महादेव कावरे ने राजिम कुंभ कल्प को भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग समन्वय के साथ काम करें और पांच फरवरी तक सभी कार्यों को पूरा करें। बैठक अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि मुख्य मंच, दुकानों, विभागीय स्टॉल, मीना बाजार, फूड ज़ोन और अन्य आवश्यक स्थलों का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के लिए वृहद स्तर पर पार्किंग सुविधा विकसित की जा रही है और हेलीपैड का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं और विशिष्ट अतिथियों को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। संभागायुक्त और कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने अधिकारियों को नदी किनारे कनेक्टिंग रोड निर्माण, गंगा आरती स्थल से नए मेला स्थल तक सड़क निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए। पूरे मेला परिसर में हाईमास्ट लाइटों पर्याप्त संख्या में शौचालय और डस्टबिन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में निर्देश दिए गए कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कंट्रोल रूम और सीसीटीवी कैमरों की स्थापना, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बस स्टैंड से नए मेला स्थल तक निर्धारित शुल्क पर बस सेवा उपलब्ध कराने, मेला स्थल पर एम्बुलेंस, मेडिकल टीम और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मेला परिसर में साधुओं के लिए कुटिया, जलाऊ लकड़ी और आवश्यक वस्तुओं की समुचित व्यवस्था, मेला क्षेत्र में पेयजल के लिए पाइपलाइन बिछाई जाए और पर्याप्त संख्या में दाल-भात केंद्र स्थापित किए जाएंगे। सुरक्षा के लिए पुलिस बल, सीसीटीवी निगरानी और अग्निशमन दल तैनात किया जाए। बैठक के बाद संभागायुक्त कावरे, पर्यटन बोर्ड के एमडी आचार्य और कलेक्टर अग्रवाल ने नए मेला स्थल पर पहुंचकर तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मुख्य मंच, वीआईपी पार्किंग, सामान्य पार्किंग, मीना बाजार, फूड ज़ोन, कंट्रोल रूम, श्रद्धालुओं के आवागमन मार्ग और हेलीपैड स्थल का जायजा लिया। इसके अलावा, राजीव लोचन मंदिर, संत समागम स्थल और गंगा आरती स्थल से नए मेला स्थल तक आने वाले मार्ग के कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
Rajim Kumbh Kalp 2024: वनवास काल में राजिम आए थे भगवान श्रीराम, माता सीता ने यहां शिवलिंग बनाकर की थी पूजा

Rajim Kumbh Kalp 2024: छत्तीसगढ़ की तीर्थनगरी राजिम में प्रवेश करते ही सड़क की चौड़ाई बढ़ जाती है। रोड के डिवाइडर में मिट्टी भरी हुई है, हरियाली लाए जाने की प्रारंभिक तैयारी होती दिख रही है। महानदी पर बने सेतु से नीचे आस्था की त्रिवेणी में मीलों तक फैले राजिम कुंभ के रंगबिरंगे शामियाने, लहराते सनातनी भगवा झंडे, जलराशि के बीच कलाकृतियां मन मोहती हैं। लक्ष्मण झूले के पास पहुंचते ही भजनों की सुमुधर आवाज सुनाई देती है। अलग-अलग घाटों पर पुण्य स्नान करते लोग दिखाई देते हैं। खेल- खिलौनों की दुकान लगाने वालों की वेशभूषा बताती है कि वे देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए हैं। राजीव लोचन मंदिर और महादेव मंदिर को जोड़ने वाले लक्ष्मण झूले (सेतु) से गुजरते बालक अपने पालकों से नीचे मेलेस्थल पर सजी दुकानों की ओर जाने की मनुहार करते हैं। नीचे रेत की बोरियों से तैयार किए गए अस्थाई घाटों पर लोग पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं। गर्म हवा से भरे विशालकाय गुब्बारों में राजनेताओं की तस्वीरें से आकाश भरा हुआ है। नीचे आधुनिक शामियानों में (डोम) लगे बड़े- बड़े कूलर बाहर की गर्मी से राहत देते हैं। दूर- दराज से आए लोग पुण्य स्नान के बाद मेले में घूम-घूम कर थकते हैं तो उन्हें इन शामियानों में बिछी कुर्सियां आराम देती हैं। राजीव लोचन मंदिर वाले तट पर पुलिस का कंट्रोल रूम 24 घंटे काम करता है। यहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मेले में गुम होने वाले लोगों को उनके परिवारों से मिलाते हैं। चप्पे- चप्पे में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखते हैं। अपराधियों पर निगरानी रखते हैं, विघ्न संतोषियों पर तत्काल कार्रवाई करते हैं। हर घंटे सैकड़ों की संख्या में सफाईकर्मी मेला परिसर की साफ- सफाई में जुटे हुए हैं। हर 10 से 20 मीटर में पाइप लाइन पर ऊंचाई में लगाई गई पानी की टोंटी साफ- सुथरा पानी उपलब्ध कराती है। भक्तिन माता राजिम समिति की ओर से मेला स्थल पर विशाल भंडारे का आयोजन भी नियमित किया गया है। राइस मिलर्स के संगठन भी मेले में आए लोगों को भोजन देने की तैयारी में जुटे हुए हैं। परिसर में जगह-जगह शौचालय लोगों को उनकी प्राकृतिक जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रहे हैं। भव्यता के बीच मेलास्थल की पवित्रता मन मोह ले रही है। मेला 24 फरवरी से शुरू हुआ है। मेला आठ मार्च तक चलेगा। इसमें देश भर के संतों का समागम होना है। नदी में जगह -जगह बांध बनाकर डाइवर्ट किया गया पानी छत्तीसगढ़ के प्रयागराज की मान्यता प्राप्त राजिम में प्रशासन की ओर से नदी के जल को विभिन्न घाटों में डाइवर्ट करने के लिए मीलों लंबा चैनल भी बनाया गया है। रेत की बोरियों से बहते जल की धारा मोड़कर स्नान करने की व्यवस्था भी की गई। घाटों की मरम्मत कर उन्हें नया रूप दिया गया है। तीन नदियों के संगम में हो रहे आयोजनों से यहां भक्ति और आस्था देखी जा रही है। भगवान श्रीराम के पड़ाव के पदचिन्हों की पावन भूमि मान्यता के अनुसार श्रीराम वनवास काल में इस पुण्य भूमि और पवित्र सरिता महानदी के तट पर आए थे। सीता माता ने यहां पर भी शिवलिंग की स्थापना कर अभिषेक किया। बाद में स्थानीय राजाओं ने समय-समय पर यहां देवालयों, शिवालयों का निर्माण कराया। आस-पास की परिधि के कई किलोमीटर के दायरे में प्रसिद्ध महादेवों के शिवालय हैं। सतयुग से जिस पुण्य भूमि का वर्णन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है उसके प्रमाण भी यहां जहां तहां उपस्थित हैं। पूरे मेला क्षेत्र में श्रीराम के वनवास से जुड़े प्रसंगों पर आधारित प्रमाण भी दिखते हैं। मेला क्षेत्र में वह कंदमूल भी दिखता है जिसने बेचने आया दुकानदार दावा करता है कि श्रीराम ने अपने वनवास काल में इसी तरह के कंदमूल का सेवन किया था। महादेव मंदिर के पास और राजीव लोचन मंदिर के प्रवेश द्वार पर तो पानी में तैरनेवाली शिला भी मेलार्थियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई दिखी। महानदी, पैरी और सोढुर नदी का संगम राजिम में महानदी, पैरी व सोढुर नदी के संगम पर प्रत्येक वर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक 15 दिनों का मेला लगता है। संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव जी विराजमान हैं। दूसरे तट पर राजीव लोचन मंदिर है। मेले के प्रारंभ होने से पहले कल्पवाश होता है। पखवाड़े भर पहले से श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा करते हैं। श्रद्धालु पटेश्वर, फिंगेश्वर, ब्रम्हनेश्वर, कोपेश्वर तथा चम्पेश्वर नाथ के पैदल भ्रमण कर दर्शन करते है तथा धूनी रमाते है। 101 किलोमीट की यात्रा का समापन पर माघ पूर्णिमा से कुंभ का आरंभ होता है। राजिम कुंभ में विभिन्न जगहों से हजारों साधु संतों का आगमन होगा। प्रतिवर्ष हजारों के संख्या में नागा साधू, संत आते हैं, तथा शाही स्नान तथा संत समागम में हिस्सा लेते हैं। लोगों में मान्यता है कि भगवान जगन्नाथपुरी जी की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक भगवान श्री राजीव लोचन तथा श्री कुलेश्वर नाथ के दर्शन नहीं कर लिए जाते। कलकत्ता से पंडाल निर्माता, राजस्थान से खिलौना विक्रेता मेले की भव्यता और राष्ट्रीयता का भाव वहां आने वाले पर्यटकों के साथ ही उसके निर्माण में लगे कारीगरों से भी निश्चित हो जाता है। मीलों फैले मेला परिसर में शामियानों के निर्माण में जहां बंगाल से आए कारीगर लगे हुए हैं। वहीं मेले स्थल में राजस्थान से यहां आकर खिलौने बेचने वाले समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में दिखते हैं। पूछने पर बताते हैं कि वह अपने परिवारों के साथ देश भर के अलग-अलग स्थानों पर लगने वाले बड़े मेलों में जाते हैं।
Rajim Kumbh Kalpa 2024: राजिम कुंभ कल्प में 3 से शुरू होगा विराट संत समागम, होगा ‘गाथा श्रीराम मंदिर की’ का आयोजन

Rajim Kumbh Kalpa 2024: माघ पूर्णिमा से प्रारंभ हुए राजिम कुंभ कल्प मेला की भव्यता दिनों दिन बढ़ रही है। राजिम कुंभ का आयोजन माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक होता है। इसमें विराट संत-समागम का प्रारंभ 3 मार्च यानी कल से होगा। साधु-संतों, महामंडलेश्वरों, आचार्य महात्माओं के लिए विशाल डोम, स्विस कॉटेज, कुटिया तथा यज्ञ शाला का निर्माण किया गया है, जिसमें संत महात्माओं द्वारा विभिन्न प्रकार के यज्ञ अनुष्ठान को पूरी वैदिक रीतियों के साथ सम्पन्न कराया जाएगा। राजिम कुंभ कल्प में 3 मार्च से शुरू होने वाली संत समागम के आयोजन में भाग लेने के लिए संतों का राजिम पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। इन महात्माओं को यथा-स्थान निर्धारित जगह पर ठहराया जा रहा है। संत समागम में भाग लेने आने वाले संत महात्माओं के ठहरने का राज्य शासन द्वारा उचित प्रबंध किया गया है। अभी तक विभिन्न संप्रदाओं और अखाड़ों के संतो का आना शुरू हो गया है। जिनमें जनकपुरी महाराज, भोलागिरि महाराज, शीतल गिरि महाराज, नागा साधु के अलावा अन्य संत भी पहुंच चुके है। इसके साथ ही भोजन, पेयजल और शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।इसके साथ ही आज से शुरू हो रहे संत समागम में ‘गाथा श्रीराम मंदिर की’ का भी आयोजन होगा। इस गाथा में श्रीराम जन्मभूमि के 500 साल के इतिहास से लेकर प्रभु श्रीराम लला की प्राणप्रतिष्ठा तक की कथा सुनाई जाएगी।
Rajim Kumbh Kalp 2024: राजिम कुंभ कल्प में तीन को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद तो चार को पहुंचेंगे प्रदीप मिश्रा

Rajim Kumbh Kalp 2024: प्रदेश की धर्मस्व नगरी में आयोजित राजिम कुंभ कल्प में तीन मार्च को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, शंकराचार्य रविंद्र केश्वानंद, देवी मंदिर के महंत और श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद महाराज, महामंडेश्वर योगीराज स्वामी, ज्ञान स्वरूपानंद अक्रिय, वृंदावन आश्रम के प्रेमानंद महाराज पहुंचेंगे। वहीं, पंडित प्रदीप मिश्रा चार मार्च को कुंभ में आएंगे। मध्यप्रदेश के गुरुशरण शर्मा पंडोखर सरकार भी राजिम पहुंचेंगे। इन्हें न्यौता दिया गया है, जिसपर उन्होंने सहमति दे दी है। राजिम कुंभ कल्प मेला में तीन मार्च से विराट संत-समागम का शुभारंभ होगा। आठ मार्च तक चलने वाले इस समागम में हरिद्वार, प्रयागराज, काशी, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, अमरकंटक, चित्रकूट, उत्तराखंड आदि स्थानों से बड़ी संख्या में साधु-संतों का आगमन होगा। राजिम कुंभ में स्थानीय कलाकारों की ओर से लगातार कार्यक्रमों का आयोजन करके भक्तिमय माहौल बनाया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने इस तरह से कार्यक्रमों का आयोजन किया है कि हर दिन भगवान राम से जुड़े हुए दो से चार कार्यक्रमों हो रहे हैं। आठ मार्च को होगा शाही स्नान राजिम कुंभ में 24 फरवरी को माघ पूर्णिमा के दिन शाही स्नान होने के बाद दूसरा चार मार्च जानकी जयंती के दिन होगा। तीसरा स्नान आठ मार्च को शिवरात्रि के दिन होगा। यही शाही स्नान होगा।
Rajim Kumbh Kalpa 2024 मोदी की गारंटी और विष्णु का सुशासन थीम पर लगाई गई है राजिम कुंभ में प्रदर्शनी

Rajim Kumbh Kalpa 2024: राजिम कुंभ कल्प 2024 मेला में लोगों को शासकीय योजनाओं की जानकारी देने जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई है। प्रदर्शनी से मेला आगंतुकों को एक ही स्थान पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी सरल और सुलभ तरीके से मिल रही है। प्रदर्शनी को मोदी की गारंटी और विष्णु का सुशासन थीम पर आकर्षक रूप से सजाया गया है। मेला आने वाले लोग प्रदर्शनी डोम में विभिन्न योजनाओं की जानकारी एलईडी में देख पा रहे है। एलईडी डिस्प्ले से वीडियो के माध्यम से योजनाओं के बारे में बताया जा रहा है। जनसंपर्क विभाग की प्रदर्शनी स्थल में प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री साय के छायाचित्र के साथ फोटो खींचाकर तत्काल निशुल्क मोबाइल में प्राप्त करने की भी सुविधा उपलब्ध है। Rajim Kumbh Kalpa 2024 लोग बड़ी संख्या में आकर योजनाओं की जानकारी लेने के साथ पीएम और सीएम के साथ फोटो खिंचवा रहे है। मेला आगंतुक प्रदर्शनी स्थल में शासन द्वारा 18 लाख परिवारों के आवास स्वीकृति, महतारी वंदन योजना के तहत विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता, रामलला दर्शन योजना, तेंदूपत्ता का खरीदी दर 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए प्रति मानक बोरा, 50 लाख से अधिक नल जल कनेक्शन, युवा शक्ति को शासन द्वारा पुलिस भर्ती में दिए गए आयु सीमा में छूट एवं सीजीपीएससी में अनियमितताओं के संबंध में सीबीआई जांच का निर्णय आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर रहे है। साधु संत भी पहुंच रहे प्रदर्शनी स्थल तक- राजिम कुंभ कल्प में देशभर से साधु संतो का आगमन शुरू हो गया है। आगंतुक संत जन मेला स्थल का भ्रमण करने के साथ जनसंपर्क प्रदर्शनी स्थल तक भी पहुंच कर योजनाओं के बारे में जानकारी ले रहे है। साथ ही राजिम मेला को पुनः राजिम कुंभ कल्प के रूप में आयोजित करने के लिए सरकार की प्रशंसा भी कर रहे है। इसी तारतम्य में सिद्धिविनायक आश्रम से आए साधुओं ने प्रदर्शनी स्थल में आकर योजनाओं की जानकारी ली। साथ ही सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रशंसा भी की। इसी प्रकार रानीपरतेवा से आए ग्रामीण श्री मिथलेश सेन ने शासन द्वारा 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति की जानकारी ली।