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राजिम के बारे में

छत्तीसगढ़ का प्रयाग है राजिम
हिंदू धर्म ग्रंथों में प्रयाग को तीर्थों का राजा कहा जाता है, वहीं राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। राजिम तीर्थ महानदी के तट पर स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। इस स्थान से जुड़ी कई विशेष मान्यताएं और परंपराएं हैं। यहां तीन नदियों का संगम होता है-महानदी, सोंढूर और पैरी। यहां कई प्राचीन मंदिर भी हैं, जो यहां का धार्मिक महत्व बढ़ाते हैं।

राजिम कुंभ में होंगे 3 स्नान, जानें तारीखें
राजिम में हर साल माघ मास की पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक धार्मिक मेले का आयोजन होता है। 15 दिनों तक चलने वाले इस मेले में 3 प्रमुख स्नान होते हैं। इस दौरान यहां लाखों लोग दर्शन और स्नान के लिए आते हैं। इस बार राजिम कुंभ का पहला प्रमुख स्नान 24 फरवरी को होगा। दूसरा 4 मार्च और अंतिम 8 मार्च यानी महाशिवरात्रि को होगा।

भगवान शिव और विष्णु के मंदिर है खास
राजिम में 2 मंदिरों की बड़ी मान्यता है। इनमें से एक शिवजी का मंदिर है तो दूसरा भगवान विष्णु का। शिवजी के मंदिर का नाम कुलेश्वर महादेव है। मान्यता है कि वनवास के दौरान स्वयं माता सीता ने इस शिवलिंग की स्थापना यहां की थी। वर्तमान में जो मंदिर यहां दिखाई देता है, वो 8वीं शताब्दी का है। इसके अलावा यहां का राजीव लोचन मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। ये भगवान विष्णु का मंदिर है। कहते हैं कि इस मंदिर के दर्शन करने से चारों धाम के दर्शन करने का फल मिलता है।

कैसे पहुंचें राजिम?
– राजिम से सबसे नजदीक एयरपोर्ट रायपुर में है, जो यहां से 43 किमी दूर है। रायपुर से टैक्सी या बस द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
– राजिम में रेलवे स्टेशन भी है जो अभनपुर-राजिम शाखा लाइन पर स्थित है। देश के सभी बड़े शहरों से यहां के लिए रेल आसानी से मिल जाती है।
– राजिम देश के सभी सड़क मार्गों से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। बस या टैक्सी से यहां आया जा सकता है।