राजिम कॉरिडोर छत्तीसगढ़ की एक महत्वाकांक्षी धार्मिक और पर्यटन परियोजना है, जिसका उद्देश्य राजिम शहर को उज्जैन के महाकाल लोक और वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर एक विश्वस्तरीय तीर्थ स्थल के रूप में पुनर्जीवित करना है। राजिम, जिसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। यह महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर स्थित है।

कॉरिडोर परियोजना की मुख्य विशेषताएं
राजिम कॉरिडोर के विकास के लिए सरकार ने व्यापक योजना तैयार की है, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैंः
भव्य मंदिर परिसरः राजिम के ऐतिहासिक राजीव लोचन मंदिर और संगम के बीच स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर को कॉरिडोर के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को एक निर्बाध और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है।
घाटों का सौंदर्यीकरणः त्रिवेणी संगम के तटों को आधुनिक घाटों के साथ विकसित किया जा रहा है। यहां आरती के लिए विशेष स्थान और श्रद्धालुओं के स्नान के लिए सुरक्षित व्यवस्था की जाएगी।
पर्यटन सुविधाएंः कॉरिडोर में भक्तों के लिए विश्राम गृह (भक्त निवास), विशाल पार्किंग क्षेत्र, संग्रहालय, और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले शिल्प ग्राम विकसित किए जाने की योजना है।
कनेक्टिविटी में सुधारः जनवरी 2026 में केंद्र सरकार ने राजिम-फिंगेश्वर-महासमुंद मार्ग के सुदृढ़ीकरण और उन्नयन के लिए 146.86 करोड़ रूपए स्वीकृत किए हैं, जो इस क्षेत्र में पहुंच को और आसान बनाएगा।

राजिम कुम्भ कल्प मेला 2026
कॉरिडोर के विकास के साथ-साथ, यहां आयोजित होने वाला वार्षिक मेले को अब राजिम कुम्भ कल्प के रूप में जाना जाता है। इस वर्ष यह भव्य कुम्भ कल्प 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
थीमः 2026 के कुम्भ की विशेष थीम बारह ज्योतिर्लिंग रखी गई है, जिसके तहत संगम स्थल पर भारत के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां और आध्यात्मिक प्रदर्शनी लगाई जा रही है।
धार्मिक गतिविधियांः मेले के दौरान शाही स्नान, संत समागम, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जाती है। इस वर्ष मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह के तहत 200 जोड़ों का विवाह भी प्रस्तावित है।
सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व
राजिम का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। यहां का राजीव लोचन मंदिर (8वीं शताब्दी) अपनी द्रविड़ और नागर शैली के मिश्रण के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि जगन्नाथ पुरी की यात्रा तब तक अधूरी रहती है जब तक भक्त राजिम में भगवान राजीव लोचन के दर्शन नहीं कर लेते।
विकास का प्रभाव
इस कॉरिडोर के निर्माण से न केवल छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार का लक्ष्य इसे एक ऐसा केंद्र बनाना है जहाँ आधुनिक बुनियादी ढांचे और प्राचीन विरासत का अद्भुत संगम हो। वर्तमान में, राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से इस परियोजना को तेजी से पूरा करने की दिशा में कार्य कर रही है।