राजिम कुम्भ कल्प 2026: संस्कृति, संस्कार और समृद्धि का जीवंत महोत्सव

छत्तीसगढ़ की पुण्यभूमि राजिम में आयोजित राजिम कुम्भ कल्प 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों का भव्य उत्सव है। महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर साकार होता यह महाकुंभ श्रद्धा, साधना और संस्कृति का अद्भुत संगम बन चुका है। इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण इसका सांस्कृतिक मंच है, जहाँ देशभर के कलाकार अपनी कला के रंग बिखेर रहे हैं।

सांस्कृतिक मंच पर लोक कला का उत्सव

राजिम कुम्भ कल्प 2026 के दौरान प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात्रि 10 बजे तक राष्ट्रीय एवं आंचलिक कलाकारों द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियाँ दी जा रही हैं। वहीं मुख्य मंच पर सायं 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक निरंतर सांस्कृतिक आयोजन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। यह मंच न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त माध्यम भी बन रहा है।


एक मंच, अनेक परंपराएँ

इस महोत्सव की विशेषता यह है कि यहाँ राष्ट्रीय और आंचलिक परंपराओं की झलक एक ही मंच पर देखने को मिलती है। भरतनाट्यम, कत्थक और ओडिशी जैसे शास्त्रीय नृत्यों से लेकर छत्तीसगढ़ की पहचान पंथी नृत्य, राउत नाचा और सुवा नृत्य तक, हर प्रस्तुति दर्शकों को भारतीय संस्कृति की विविधता से परिचित कराती है। रामलीला, रामायण पाठ और महाभारत आधारित नाट्य प्रस्तुतियाँ धार्मिक चेतना को और गहराई प्रदान करती हैं।

कलाकारों को मिला सशक्त मंच

राजिम कुम्भ कल्प 2026 कलाकारों के लिए एक सशक्त और सम्मानजनक मंच साबित हो रहा है। यहाँ न केवल प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं, बल्कि स्थानीय और आंचलिक कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का भरपूर अवसर मिल रहा है। इस वर्ष 225 आंचलिक और 30 विविध देशव्यापी प्रस्तुतियाँ इस सांस्कृतिक मंच की शोभा बढ़ा रही हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।


लोक विधाओं की अनूठी छटा

स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों में पंडवानी, मानस गान, जगराता, जसगीत जगराता, रामधुनी, जस झांकी, सुगम गायन, सतनाम मंगल भजन, फाग मंडली और लोक कला मंच जैसी विधाएँ शामिल हैं। इसके साथ ही भरथरी गायन, बांसुरी वादन और हास्य प्रस्तुतियाँ भी दर्शकों के बीच विशेष लोकप्रियता प्राप्त कर रही हैं। ये सभी प्रस्तुतियाँ छत्तीसगढ़ की लोक आत्मा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं।
संस्कृति से समृद्धि की ओर
राजिम कुम्भ कल्प 2026 यह संदेश देता है कि संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की दिशा भी है। यह आयोजन कलाकारों को रोजगार, पहचान और सम्मान प्रदान करने के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई ऊँचाइयों तक ले जा रहा है। श्रद्धालु, पर्यटक और कला प्रेमी, सभी के लिए यह महोत्सव एक अविस्मरणीय अनुभव बन रहा है।

राजिम कुम्भ कल्प 2026 संस्कृति, संस्कार और समृद्धि का ऐसा प्रतीक है, जहाँ आस्था और कला एक-दूसरे में घुलकर भारत की आत्मा को अभिव्यक्त करती हैं। यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक चेतना को एक सूत्र में पिरोने का सफल प्रयास है। आने वाले दिनों में भी यह कुम्भ कल्प अपनी सांस्कृतिक गरिमा और कलात्मक वैभव से जनमानस को प्रेरित करता रहेगा।