राजिम कुम्भ कल्प 2026: संत समागम परिसर में सजा पंडोखर सरकार का दिव्य दरबार

 

श्रद्धा और आध्यात्म का अद्भुत संगम

छत्तीसगढ़ की पावन त्रिवेणी संगम भूमि पर आयोजित राजिम कुम्भ कल्प 2026 इन दिनों आस्था, आध्यात्म और संस्कृति का विराट उत्सव बनकर उभर रहा है। इसी भव्य आयोजन के अंतर्गत संत समागम परिसर में पंडोखर सरकार के नाम से विख्यात गुरूशरण महाराज का दिव्य दरबार विशेष आकर्षण का केंद्र बना। दूर-दराज के जिलों और विभिन्न प्रदेशों से हजारों श्रद्धालु इस दरबार में शामिल होने पहुंचे, जिससे पूरे परिसर में भक्ति और विश्वास का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया।

दरबार का आयोजन विशाल और सुसज्जित पंडाल में किया गया था, जहां प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हो रहा था। मंच को पारंपरिक सज्जा से अलंकृत किया गया था और वैदिक परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। भगवान की आरती और गुरू पूजन के साथ दरबार का शुभारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार की पवित्र ध्वनि और श्रद्धालुओं की सामूहिक उपस्थिति ने वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया।


गुरूशरण महाराज के दरबार में पहुंचे श्रद्धालु अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं के समाधान की अपेक्षा लेकर उपस्थित हुए थे। कई लोग जीवन की जटिलताओं, मानसिक तनाव, पारिवारिक मतभेद या अन्य चिंताओं के साथ मार्गदर्शन की तलाश में आए थे। दरबार के दौरान गुरूशरण महाराज श्रद्धालुओं को संकेत देकर अपने समीप बुलाते और उनकी बातें धैर्यपूर्वक सुनते। इसके पश्चात वे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करते तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उपाय बताते।

श्रद्धालुओं के अनुसार, दरबार में मिला परामर्श केवल समस्या का समाधान भर नहीं था, बल्कि आत्मिक संतोष और मानसिक शांति का माध्यम भी बना। कई लोगों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें यहां आकर एक नई ऊर्जा और विश्वास प्राप्त हुआ। उनका मानना था कि आध्यात्मिक संवाद के माध्यम से उन्हें अपने जीवन को देखने का एक नया दृष्टिकोण मिला।

दरबार के दौरान संत समागम परिसर में भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक चर्चाओं का क्रम भी लगातार चलता रहा। मधुर भजनों की ध्वनि, ढोल-मंजीरे की ताल और भक्तों की सामूहिक सहभागिता ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भावविभोर होकर भजनों में शामिल होते और आध्यात्मिक अनुभूति का आनंद लेते नजर आए।

राजिम कुम्भ कल्प का यह संत समागम केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरण का भी संदेश देता दिखाई दिया। यहां विभिन्न पृष्ठभूमि, आयु और क्षेत्रों से आए लोग एक साथ बैठकर आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे थे। यह दृश्य अपने आप में भारतीय संत परंपरा की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है, जहां गुरु-शिष्य परंपरा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका से श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित ढंग से दरबार में प्रवेश और दर्शन का अवसर मिला। सुरक्षा और व्यवस्थापन के कारण कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से संपन्न हुआ।

राजिम कुम्भ कल्प 2026 का यह दिव्य दरबार न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना, बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक संतुलन का संदेश भी दे गया। भक्ति, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत यह आयोजन लंबे समय तक श्रद्धालुओं की स्मृतियों में अंकित रहेगा।

संत समागम परिसर में सजा यह दिव्य दरबार राजिम कुम्भ कल्प के आध्यात्मिक वैभव का जीवंत उदाहरण रहा, जहां हजारों लोगों ने एक साथ मिलकर श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।