छत्तीसगढ़ के प्राचीन वैष्णव तीर्थ राजिम स्थित राजीव लोचन मंदिर में 8वीं–9वीं शताब्दी की गजलक्ष्मी प्रतिमा आज भी श्रद्धा, कला और सांस्कृतिक समृद्धि का सजीव प्रमाण है। कृषि, उर्वरता और ऐश्वर्य की प्रतीक मानी जाने वाली यह प्रतिमा मंदिर की शिल्प परंपरा को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।
नगर के प्रमुख भगवान विष्णु के स्वरूप राजीव लोचन मंदिर के चारों कोणों पर चार धाम के रूप में नरसिंह अवतार, वराह अवतार, वामन अवतार एवं बद्री नारायण भगवान के मंदिर स्थापित हैं। पश्चिमाभिमुख बद्री नारायण मंदिर की पीछे की भित्ति पर देवी-देवताओं की उत्कृष्ट उत्कीर्ण प्रतिमाएं हैं, जिनमें उत्तराभिमुख गजलक्ष्मी की प्रतिमा विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इन्हें कृषि और उर्वरता की देवी के साथ-साथ राज को समृद्धि प्रदान करने वाली ‘राजलक्ष्मी’ भी कहा गया है।

शास्त्रों में लक्ष्मी के आठ स्वरूप—आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयालक्ष्मी एवं विद्यालक्ष्मी—वर्णित हैं। दीपावली के अवसर पर लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि प्रत्येक गृह, प्रतिष्ठान एवं कार्यस्थल पर लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी की पूजा श्रेष्ठ मानी गई है। राजिम में भगवान राजीव लोचन के साथ लक्ष्मी माता, लक्ष्मी नारायण मंदिर, राम मंदिर सहित अनेक मंदिरों की उपस्थिति वैष्णव परंपरा को सुदृढ़ करती है। साथ ही कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर और मां महामाया के शक्तिपीठ से शैव, शाक्त एवं वैष्णव परंपराओं का समन्वय इस नगरी की विशिष्ट पहचान है।

राजीव लोचन मंदिर में स्थित गजलक्ष्मी की प्रतिमा खड़ी मुद्रा में है। देवी लक्ष्मी अपने चार हाथों के साथ सुशोभित हैं, जिनमें प्रकृति, दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प, श्रमशीलता एवं व्यवस्था शक्ति के प्रतीक भाव निहित हैं। लगभग डेढ़ फीट ऊंची यह मनोहारी प्रतिमा भूरे पत्थर पर उत्कीर्ण है, जिसमें मूर्तिकार की छेनी-हथौड़ी की अद्भुत दक्षता परिलक्षित होती है। इसका निर्माण मंदिर के समकालीन 8वीं–9वीं शताब्दी का माना जाता है।
पुराणों में हाथी को राजसी पशु माना गया है। गजलक्ष्मी का वाहन श्वेत हाथी है, जिसे उत्कीर्ण चित्रों में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। मान्यता है कि गजलक्ष्मी ने भगवान इंद्र को समुद्र की गहराई से खोए हुए धन को प्राप्त कराने में सहायता की थी।
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार लक्ष्मी का एक नाम कमला है और वे दसमहाविद्याओं में भी स्थान रखती हैं। स्कंद पुराण के अनुसार समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में लक्ष्मीजी भी थीं, जिन्हें भगवान विष्णु ने अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। पुराणों में लक्ष्मी के विभिन्न निवास—बैकुंठ, स्वर्ग, गृह, यज्ञ, गोलोक, पाताल और भूलोक—का उल्लेख मिलता है, जिनमें राजलक्ष्मी का पाताल और भूलोक में निवास बताया गया है।

इस प्रकार राजीव लोचन मंदिर की गजलक्ष्मी प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय शिल्पकला, वैष्णव परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि की अमूल्य विरासत के रूप में आज भी श्रद्धालुओं और इतिहासप्रेमियों को आकर्षित करती है।