राजिम कुम्भ में राज्य के कलाकारों को मिलता है सशक्त मंच

राजिम कुम्भ कल्प 2026 छत्तीसगढ़ की धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। पवित्र त्रिवेणी संगम की भूमि पर आयोजित यह महापर्व केवल संत-समागम और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यहां लोकसंस्कृति, लोककला और आंचलिक प्रतिभाओं को भी विशेष सम्मान और अवसर प्रदान किया जाता है। राजिम कुम्भ में आंचलिक कलाकारों को मिलने वाला मंच छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन चुका है।


राजिम कुम्भ के आयोजन में प्रतिवर्ष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विशेष श्रृंखला आयोजित की जाती है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों और अंचलों से आए लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं। इन प्रस्तुतियों में पंथी नृत्य, राउत नाचा, सुआ नृत्य, करमा, जसगीत, भजन, लोकगाथाएं तथा पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनियां शामिल रहती हैं। यह मंच कलाकारों को अपनी पारंपरिक कला को व्यापक दर्शक वर्ग के सामने प्रस्तुत करने का अवसर देता है।

आंचलिक कलाकारों के लिए राजिम कुम्भ का मंच केवल प्रस्तुति का स्थान नहीं, बल्कि पहचान और सम्मान का माध्यम भी है। यहां कलाकारों की कला को श्रद्धालुओं, पर्यटकों और विभिन्न राज्यों से आए अतिथियों द्वारा देखा और सराहा जाता है। इससे कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें भविष्य में अन्य मंचों पर अवसर प्राप्त करने की संभावनाएं भी मजबूत होती हैं।

राजिम कुम्भ में आयोजित सांस्कृतिक संध्याएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होती हैं। दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों और दर्शन के पश्चात संध्या काल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम वातावरण को आनंद, भक्ति और उल्लास से भर देते हैं। आंचलिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से लोकजीवन, परंपरा और सामाजिक मूल्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं।


आयोजन समिति और जिला प्रशासन द्वारा आंचलिक कलाकारों के चयन, मंच व्यवस्था और समय निर्धारण को लेकर विशेष ध्यान दिया जाता है। कलाकारों को सुव्यवस्थित मंच, निर्धारित समय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे वे गरिमापूर्ण वातावरण में अपनी प्रस्तुति दे सकें। यह व्यवस्था स्थानीय प्रतिभाओं के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

राजिम कुम्भ का यह सांस्कृतिक मंच लोककला के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आधुनिकता के दौर में जब कई पारंपरिक कलाएं लुप्त होने की कगार पर हैं, ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन्हें नया जीवन और नई पहचान मिलती है। युवा पीढ़ी भी इन प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ती है।


इसके साथ ही, राजिम कुम्भ में आंचलिक कलाकारों को मंच मिलने से स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता है। गांव-कस्बों से जुड़े कलाकार अपनी कला को लेकर अधिक सक्रिय होते हैं और नई पीढ़ी को भी लोककला सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। यह सांस्कृतिक निरंतरता को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है।

राजिम कुम्भ कल्प 2026 में आंचलिक कलाकारों को मिलने वाला मंच आस्था, संस्कृति और परंपरा का सशक्त संगम है। यह मंच छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने, स्थानीय प्रतिभाओं को सम्मान देने और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राजिम कुम्भ न केवल धार्मिक महापर्व है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत उत्सव भी है।