राजिम का पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव: मान्यताओं में जीवित माता सीता द्वारा रेत से शिवलिंग निर्माण की परंपरा

छत्तीसगढ़ की पवित्र नगरी राजिम, जिसे श्रद्धालु त्रिवेणी संगम की भूमि के रूप में जानते हैं, धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के कारण विशेष महत्व रखती है। महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम तट पर स्थित पंचमुखी भगवान श्री कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर को आस्था और पौराणिक विश्वासों का केंद्र माना जाता है। स्थानीय जनश्रुतियों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार यह स्थान भगवान शिव की विशेष कृपा से जुड़ा हुआ माना जाता है।

प्राचीन मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

धार्मिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर अत्यंत प्राचीन माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मंदिर की संरचना और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा इसे एक विशेष तीर्थ स्थल बनाती है। मंदिर ऊंचे चबूतरे पर स्थित है, जिसे श्रद्धालु इस बात का प्रतीक मानते हैं कि यह स्थान प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच भी आस्था का केंद्र बना हुआ है।

मंदिर परिसर में स्थित पीपल के वृक्ष को भी भक्त विशेष श्रद्धा से देखते हैं और इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए विभिन्न दिशाओं से बने मार्ग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक माने जाते हैं।

मान्यता: माता सीता ने रेत से किया था शिवलिंग निर्माण

धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण इस क्षेत्र में पहुंचे थे। कहा जाता है कि त्रिवेणी संगम में स्नान के बाद माता सीता ने भगवान शिव की आराधना के लिए रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और विधि-विधान से पूजा की।

जनश्रुति के अनुसार, यह शिवलिंग दिव्य स्वरूप में प्रतिष्ठित हुआ और पंचमुखी रूप में पूजनीय माना जाने लगा। तभी से इस स्थान को पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

शिव आराधना की पवित्र भूमि के रूप में राजिम की पहचान

धार्मिक विश्वासों के अनुसार राजिम क्षेत्र में अनेक प्राचीन शिवलिंग और शिव मंदिर स्थित हैं, जिन्हें भक्त विशेष आस्था के साथ पूजते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि यह क्षेत्र भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र है और यहां दर्शन एवं पूजा करने से आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।


आज भी निभाई जाती है रेत से शिवलिंग बनाने की परंपरा

स्थानीय परंपराओं और श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार, माता सीता द्वारा की गई शिव आराधना की स्मृति में आज भी विशेष अवसरों और धार्मिक पर्वों पर भक्त त्रिवेणी संगम में स्नान कर रेत से शिवलिंग का निर्माण करते हैं। इसके बाद जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की जाती है। यह परंपरा श्रद्धा और भक्ति की अभिव्यक्ति के रूप में देखी जाती है।

भक्तों का विश्वास है कि इस प्रकार की पूजा से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में दर्शन और पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक संतोष और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।


आस्था और परंपरा का जीवंत प्रतीक

राजिम का कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर धार्मिक मान्यताओं, जनश्रुतियों और आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। माता सीता द्वारा रेत से शिवलिंग निर्माण की कथा और उससे जुड़ी परंपराएं आज भी श्रद्धालुओं की आस्था को मजबूत करती हैं।

यह स्थल उन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो भगवान शिव की आराधना और प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़कर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं।