छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की समृद्ध परंपरा में आज कई युवा कलाकारों ने अपनी अलग पहचान बनाई है, जिनमें से एक प्रमुख नाम आरू साहू का है। आरू साहू छत्तीसगढ़ की युवा लोक गायिका हैं, जिनकी मधुर आवाज और सांस्कृतिक गीतों की प्रस्तुति ने उन्हें प्रदेश में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति दी है। उनकी कला पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की आत्मा को नए स्वरूप में जीवंत करती है और श्रोताओं को लोक संस्कृति की गहराई से जोड़ती है। राजिम कुम्भ कल्प 2026 में आरू साहू 8 फरवरी को रात 8 बजे अपनी संगीतमयी प्रस्तुति देने जा रही है।
आरू साहू, बेहद कम उम्र में ही लोक संगीत के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका में आईं। उनकी सुमधुर गायन शैली और भावपूर्ण प्रस्तुति ने उन्हें युवा वर्ग के साथ-साथ पारंपरिक संगीत प्रेमियों के बीच भी लोकप्रिय किया है। “छत्तीसगढ़िया बेटी” की उपाधि से पहचानी जाने वाली आरू साहू ने कई पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीतों को अपनी आवाज दी है, जिनमें “Karar Karar Tor Mechha He Saga,” “Hariyar Hariyar” और “Mauha Gire Re” जैसे गीत शामिल हैं, जो दर्शकों के बीच अच्छी खासी चर्चित हुए हैं।
आरू साहू का संगीत छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा की विविधता को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने करमा, सुवा, ददरिया तथा पंडवानी जैसे पारंपरिक गीतों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी है, जिनसे दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठते हैं। नगरी में आयोजित विजयदशमी और नवदुर्गा महोत्सव के अवसर पर उनकी प्रस्तुति ने लोक संस्कृति की महक को और भी प्रगाढ़ किया और दर्शकों ने उनके गीतों का भरपूर आनंद लिया।

संगीत के क्षेत्र में आरू साहू की सफलता केवल मंच प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने कई प्रतिष्ठित आयोजनों और सांस्कृतिक महोत्सवों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न सांस्कृतिक मंचों जैसे राज्योत्सव 2025 में भी उनकी प्रस्तुति ने बड़े उत्साह का वातावरण बनाया और लोगों को छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की समृद्धि का अनुभव कराया।
सिर्फ लोकगीत प्रस्तुत करना ही नहीं, आरू साहू ने छत्तीसगढ़ी कलाकारों के लिए राष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने मुंबई में आयोजित ‘Born to Shine’ प्रतियोगिता में चयनित होकर टॉप 30 गायकों में स्थान प्राप्त किया और अपनी गायन प्रतिभा से जूरी का ध्यान आकर्षित किया। इस उपलब्धि के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर प्रशंसा और बधाई भी प्राप्त हुई, जिसमें जिला प्रशासन द्वारा भी उनका अभिनंदन किया गया।
नववर्ष 2026 में भी आरू साहू की लोकप्रियता ने नई ऊँचाइयाँ छुईं, जब उन्हें डोंगाडुला (सिहावा विधानसभा क्षेत्र) की लोक कला के संरक्षण और प्रचार के लिए “युवा रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मुख्यमंत्री के हाथों प्रदान किया गया, जो उनके संगीत के प्रति निष्ठा और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संवर्धन के लिए एक मान्यता माना जा रहा है।
आरू साहू की उपलब्धियाँ न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा को दर्शाती हैं बल्कि यह भी प्रदर्शित करती हैं कि कैसे युवा कलाकार छत्तीसगढ़ की लोक कला को नयी पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनकी गायन यात्रा ने छत्तीसगढ़ी गीतों को आधुनिक मंचों पर भी मजबूती से स्थापित किया है और लोक संगीत के आने वाले कलाओं को प्रेरणा दी है।