Rajim Kumbh: इस बार अद्भुत होगा राजिम कुंभ कल्प, सीएम ने अधिकारियों को दिए खास निर्देश

रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में प्रसिद्ध राजिम में 12 फरवरी से 26 फरवरी 2025 तक कुंभ कल्प का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष यह अद्भुत धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन 52 एकड़ के नए प्रस्तावित मेला स्थल में संपन्न होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को राजिम कुंभ कल्प के तैयारियों के संबंध में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने शाही स्नान, गंगा आरती, संत समागम समेत कुंभ कल्प के प्रमुख आयोजनों और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। सीएम ने कहा अद्भुत होगा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प 2025 धर्म, आस्था और संस्कृति का अद्भुत समागम होगा और यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को प्रदर्शित करने का भी सुंदर माध्यम है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि श्रद्धालुओं को यहां अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त हो और यह आयोजन हमारी गौरवशाली विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाएं। सीएम ने अधिकारियों के दिए निर्देश सीएम साय ने राजिम कुंभ कल्प के आयोजन में शामिल समस्त विभागों और प्रशासनिक अमले को आपस में समन्वय स्थापित कर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं के आवागमन की व्यवस्था, सुरक्षा संबंधी उपाय और स्वच्छता के लिए विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि “हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस आयोजन को सफल बनाएं और छत्तीसगढ़ की पहचान के रूप में इसे स्थापित करें। उन्होंने 12 फरवरी को आयोजित माघी पुन्नी स्नान, 21 फरवरी जानकी जयंती के अवसर पर संत समागम और 26 फरवरी को होने वाले शाही स्नान की तैयारी पर विशेष ध्यान देने को कहा। राजिम में होंगे विशेष आयोजन 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजिम कुंभ कल्प का शुभारंभ होगा और 26 फरवरी महाशिवरात्रि को इसका समापन होगा। राजिम कुंभ कल्प पैरी, महानदी और सोंढूर नदी के संगम पर आयोजित होगा। राजिम कुंभ कल्प के संपूर्ण आयोजन के लिए पर्यटन विभाग को नोडल बनाया गया है। 15 दिनों तक चलने वाले इस कुंभ कल्प में पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी साधु संतों का विराट समागम होगा। माघी पुन्नी स्नान, शाही स्नान, जानकी जयंती के अवसर पर संत समागम विशेष रूप से आयोजित होगा। प्रतिदिन सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन, मेला, मड़ई, मीना बाजार और विभागीय प्रदर्शनी भी कुंभ कल्प का विशेष आकर्षण के रूप में शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ कल्प का आयोजन 12 फरवरी से 26 फरवरी तक

राजिम: छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ कल्प का आयोजन 12 फरवरी से 26 फरवरी तक होने जा रहा है. इस बार राजिम कुंभ महोत्सव का मेला स्थल बदला जाएगा. जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार मेला स्थल अब संगम स्थल में नहीं, बल्कि वहां से 750 मीटर दूर लक्ष्मण झूला और चौबे बांधा के बीच लगेगा. राजिम कुंभ मेला भारत के आदिवासियों के लिए महत्वपूर्ण मेला रहता है. माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक पंद्रह दिनों का मेला लगता है. कहां लगता है राजिम कुंभ मेला : यह मेला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 45 किलोमीटर दूर सोंढूर, पैरी और महानदी नदी के त्रिवेणी संगम पर लगता है. इस मेले में छत्तीसगढ़ को देशभर में धर्म, कला और संस्कृति की त्रिवेणी के रूप में ख्यात कर दिया है और एक नई पहचान भी दी है. सच कहें तो अनादि काल से छत्तीसगढ़ियों के विश्वास और पवित्रता का दूसरा नाम है राजिम-कुंभ. कहते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य के राजिम क्षेत्र राजिम माता के त्याग की कथा प्रचलित है और भगवान कुलेश्वर महादेव का आशीर्वाद इस क्षेत्र को प्राप्त है. दोनों ही कारणों से राजिम मेला आयोजित होता है. छत्तीसगढ़ का प्रयाग छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाला राजिम धर्म, अध्यात्म, परंपरा और संस्कृति का संगम है. राजिम में तीन नदियों का संगम है, लिहाजा इसे भी त्रिवेणी संगम के नाम से लोग पुकारते हैं. राजिम कुंभ कल्प का आगाज शनिवार को त्रिवेणी संगम में हो चुका है. माघ पूर्णिमा से 15 दिन तक मेला लगता है.

राजिम कुंभ कल्प 2025: इस साल नए मेला स्थल पर होगा भव्य आयोजन, तैयारियां जोरों पर, 12 फरवरी से शुरू

छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहे जाने वाला राजिम में कुंभ मेला आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। इस साल यह आयोजन 12 से 26 फरवरी तक चलेगा। साथ ही मेला स्थल भी दूसरा रहेगा। यह कुंभ कल्प माघ पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक आयोजित होता है, जहां देशभर से संत-महात्मा, श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है, जिसे छत्तीसगढ़ का प्रयागराज भी कहा जाता है। राजिम कुंभ कल्प न केवल धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। इस आयोजन में शाही स्नान, संत समागम, प्रवचन, गंगा आरती और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजिम कुंभ कल्प 2025 में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तत्परता के साथ तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है, जिससे यह आयोजन ऐतिहासिक और भव्य रूप में संपन्न हो सके। इस साल नए मेला स्थल पर यह आयोजन किया जाएगा। मेलार्थियों के लिए समुचित सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इस लेकर राजिम सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें रायपुर संभागायुक्त महादेव कावरे, पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य, गरियाबंद कलेक्टर दीपक अग्रवाल सहित धमतरी और रायपुर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के बाद अधिकारियों ने नए मेला स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में संभागायुक्त महादेव कावरे ने राजिम कुंभ कल्प को भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग समन्वय के साथ काम करें और पांच फरवरी तक सभी कार्यों को पूरा करें। बैठक अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि मुख्य मंच, दुकानों, विभागीय स्टॉल, मीना बाजार, फूड ज़ोन और अन्य आवश्यक स्थलों का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के लिए वृहद स्तर पर पार्किंग सुविधा विकसित की जा रही है और हेलीपैड का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं और विशिष्ट अतिथियों को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। संभागायुक्त और कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने अधिकारियों को नदी किनारे कनेक्टिंग रोड निर्माण, गंगा आरती स्थल से नए मेला स्थल तक सड़क निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए। पूरे मेला परिसर में हाईमास्ट लाइटों पर्याप्त संख्या में शौचालय और डस्टबिन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में निर्देश दिए गए कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कंट्रोल रूम और सीसीटीवी कैमरों की स्थापना, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बस स्टैंड से नए मेला स्थल तक निर्धारित शुल्क पर बस सेवा उपलब्ध कराने, मेला स्थल पर एम्बुलेंस, मेडिकल टीम और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मेला परिसर में साधुओं के लिए कुटिया, जलाऊ लकड़ी और आवश्यक वस्तुओं की समुचित व्यवस्था, मेला क्षेत्र में पेयजल के लिए पाइपलाइन बिछाई जाए और पर्याप्त संख्या में दाल-भात केंद्र स्थापित किए जाएंगे। सुरक्षा के लिए पुलिस बल, सीसीटीवी निगरानी और अग्निशमन दल तैनात किया जाए। बैठक के बाद संभागायुक्त कावरे, पर्यटन बोर्ड के एमडी आचार्य और कलेक्टर अग्रवाल ने नए मेला स्थल पर पहुंचकर तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मुख्य मंच, वीआईपी पार्किंग, सामान्य पार्किंग, मीना बाजार, फूड ज़ोन, कंट्रोल रूम, श्रद्धालुओं के आवागमन मार्ग और हेलीपैड स्थल का जायजा लिया। इसके अलावा, राजीव लोचन मंदिर, संत समागम स्थल और गंगा आरती स्थल से नए मेला स्थल तक आने वाले मार्ग के कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

Rajim Kumbh Kalp 2024: वनवास काल में राजिम आए थे भगवान श्रीराम, माता सीता ने यहां शिवलिंग बनाकर की थी पूजा

Rajim Kumbh Kalp 2024: छत्‍तीसगढ़ की तीर्थनगरी राजिम में प्रवेश करते ही सड़क की चौड़ाई बढ़ जाती है। रोड के डिवाइडर में मिट्टी भरी हुई है, हरियाली लाए जाने की प्रारंभिक तैयारी होती दिख रही है। महानदी पर बने सेतु से नीचे आस्था की त्रिवेणी में मीलों तक फैले राजिम कुंभ के रंगबिरंगे शामियाने, लहराते सनातनी भगवा झंडे, जलराशि के बीच कलाकृतियां मन मोहती हैं। लक्ष्मण झूले के पास पहुंचते ही भजनों की सुमुधर आवाज सुनाई देती है। अलग-अलग घाटों पर पुण्य स्नान करते लोग दिखाई देते हैं। खेल- खिलौनों की दुकान लगाने वालों की वेशभूषा बताती है कि वे देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए हैं। राजीव लोचन मंदिर और महादेव मंदिर को जोड़ने वाले लक्ष्मण झूले (सेतु) से गुजरते बालक अपने पालकों से नीचे मेलेस्थल पर सजी दुकानों की ओर जाने की मनुहार करते हैं। नीचे रेत की बोरियों से तैयार किए गए अस्थाई घाटों पर लोग पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं। गर्म हवा से भरे विशालकाय गुब्बारों में राजनेताओं की तस्वीरें से आकाश भरा हुआ है। नीचे आधुनिक शामियानों में (डोम) लगे बड़े- बड़े कूलर बाहर की गर्मी से राहत देते हैं। दूर- दराज से आए लोग पुण्य स्नान के बाद मेले में घूम-घूम कर थकते हैं तो उन्हें इन शामियानों में बिछी कुर्सियां आराम देती हैं। राजीव लोचन मंदिर वाले तट पर पुलिस का कंट्रोल रूम 24 घंटे काम करता है। यहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मेले में गुम होने वाले लोगों को उनके परिवारों से मिलाते हैं। चप्पे- चप्पे में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखते हैं। अपराधियों पर निगरानी रखते हैं, विघ्न संतोषियों पर तत्काल कार्रवाई करते हैं। हर घंटे सैकड़ों की संख्या में सफाईकर्मी मेला परिसर की साफ- सफाई में जुटे हुए हैं। हर 10 से 20 मीटर में पाइप लाइन पर ऊंचाई में लगाई गई पानी की टोंटी साफ- सुथरा पानी उपलब्ध कराती है। भक्तिन माता राजिम समिति की ओर से मेला स्थल पर विशाल भंडारे का आयोजन भी नियमित किया गया है। राइस मिलर्स के संगठन भी मेले में आए लोगों को भोजन देने की तैयारी में जुटे हुए हैं। परिसर में जगह-जगह शौचालय लोगों को उनकी प्राकृतिक जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रहे हैं। भव्यता के बीच मेलास्थल की पवित्रता मन मोह ले रही है। मेला 24 फरवरी से शुरू हुआ है। मेला आठ मार्च तक चलेगा। इसमें देश भर के संतों का समागम होना है। नदी में जगह -जगह बांध बनाकर डाइवर्ट किया गया पानी छत्तीसगढ़ के प्रयागराज की मान्यता प्राप्त राजिम में प्रशासन की ओर से नदी के जल को विभिन्न घाटों में डाइवर्ट करने के लिए मीलों लंबा चैनल भी बनाया गया है। रेत की बोरियों से बहते जल की धारा मोड़कर स्नान करने की व्यवस्था भी की गई। घाटों की मरम्मत कर उन्हें नया रूप दिया गया है। तीन नदियों के संगम में हो रहे आयोजनों से यहां भक्ति और आस्था देखी जा रही है। भगवान श्रीराम के पड़ाव के पदचिन्‍हों की पावन भूमि मान्यता के अनुसार श्रीराम वनवास काल में इस पुण्य भूमि और पवित्र सरिता महानदी के तट पर आए थे। सीता माता ने यहां पर भी शिवलिंग की स्थापना कर अभिषेक किया। बाद में स्थानीय राजाओं ने समय-समय पर यहां देवालयों, शिवालयों का निर्माण कराया। आस-पास की परिधि के कई किलोमीटर के दायरे में प्रसिद्ध महादेवों के शिवालय हैं। सतयुग से जिस पुण्य भूमि का वर्णन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है उसके प्रमाण भी यहां जहां तहां उपस्थित हैं। पूरे मेला क्षेत्र में श्रीराम के वनवास से जुड़े प्रसंगों पर आधारित प्रमाण भी दिखते हैं। मेला क्षेत्र में वह कंदमूल भी दिखता है जिसने बेचने आया दुकानदार दावा करता है कि श्रीराम ने अपने वनवास काल में इसी तरह के कंदमूल का सेवन किया था। महादेव मंदिर के पास और राजीव लोचन मंदिर के प्रवेश द्वार पर तो पानी में तैरनेवाली शिला भी मेलार्थियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई दिखी। महानदी, पैरी और सोढुर नदी का संगम राजिम में महानदी, पैरी व सोढुर नदी के संगम पर प्रत्येक वर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक 15 दिनों का मेला लगता है। संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव जी विराजमान हैं। दूसरे तट पर राजीव लोचन मंदिर है। मेले के प्रारंभ होने से पहले कल्पवाश होता है। पखवाड़े भर पहले से श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा करते हैं। श्रद्धालु पटेश्वर, फिंगेश्वर, ब्रम्हनेश्वर, कोपेश्वर तथा चम्पेश्वर नाथ के पैदल भ्रमण कर दर्शन करते है तथा धूनी रमाते है। 101 किलोमीट की यात्रा का समापन पर माघ पूर्णिमा से कुंभ का आरंभ होता है। राजिम कुंभ में विभिन्न जगहों से हजारों साधु संतों का आगमन होगा। प्रतिवर्ष हजारों के संख्या में नागा साधू, संत आते हैं, तथा शाही स्नान तथा संत समागम में हिस्सा लेते हैं। लोगों में मान्यता है कि भगवान जगन्नाथपुरी जी की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक भगवान श्री राजीव लोचन तथा श्री कुलेश्वर नाथ के दर्शन नहीं कर लिए जाते। कलकत्ता से पंडाल निर्माता, राजस्थान से खिलौना विक्रेता मेले की भव्यता और राष्ट्रीयता का भाव वहां आने वाले पर्यटकों के साथ ही उसके निर्माण में लगे कारीगरों से भी निश्चित हो जाता है। मीलों फैले मेला परिसर में शामियानों के निर्माण में जहां बंगाल से आए कारीगर लगे हुए हैं। वहीं मेले स्थल में राजस्थान से यहां आकर खिलौने बेचने वाले समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में दिखते हैं। पूछने पर बताते हैं कि वह अपने परिवारों के साथ देश भर के अलग-अलग स्थानों पर लगने वाले बड़े मेलों में जाते हैं।

Rajim Kumbh Kalpa 2024: राजिम कुंभ कल्प में 3 से शुरू होगा विराट संत समागम, होगा ‘गाथा श्रीराम मंदिर की’ का आयोजन

Rajim Kumbh Kalpa 2024: राजिम कुंभ कल्प में 3 से शुरू होगा विराट संत समागम, होगा ‘गाथा श्रीराम मंदिर की’ का आयोजन

Rajim Kumbh Kalpa 2024: माघ पूर्णिमा से प्रारंभ हुए राजिम कुंभ कल्प मेला की भव्यता दिनों दिन बढ़ रही है। राजिम कुंभ का आयोजन माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक होता है। इसमें विराट संत-समागम का प्रारंभ 3 मार्च यानी कल से होगा। साधु-संतों, महामंडलेश्वरों, आचार्य महात्माओं के लिए विशाल डोम, स्विस कॉटेज, कुटिया तथा यज्ञ शाला का निर्माण किया गया है, जिसमें संत महात्माओं द्वारा विभिन्न प्रकार के यज्ञ अनुष्ठान को पूरी वैदिक रीतियों के साथ सम्पन्न कराया जाएगा। राजिम कुंभ कल्प में 3 मार्च से शुरू होने वाली संत समागम के आयोजन में भाग लेने के लिए संतों का राजिम पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। इन महात्माओं को यथा-स्थान निर्धारित जगह पर ठहराया जा रहा है। संत समागम में भाग लेने आने वाले संत महात्माओं के ठहरने का राज्य शासन द्वारा उचित प्रबंध किया गया है। अभी तक विभिन्न संप्रदाओं और अखाड़ों के संतो का आना शुरू हो गया है। जिनमें जनकपुरी महाराज, भोलागिरि महाराज, शीतल गिरि महाराज, नागा साधु के अलावा अन्य संत भी पहुंच चुके है। इसके साथ ही भोजन, पेयजल और शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।इसके साथ ही आज से शुरू हो रहे संत समागम में ‘गाथा श्रीराम मंदिर की’ का भी आयोजन होगा। इस गाथा में श्रीराम जन्मभूमि के 500 साल के इतिहास से लेकर प्रभु श्रीराम लला की प्राणप्रतिष्ठा तक की कथा सुनाई जाएगी।

Rajim Kumbh Kalp 2024: राजिम कुंभ कल्‍प में तीन को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद तो चार को पहुंचेंगे प्रदीप मिश्रा

Rajim Kumbh Kalp 2024: राजिम कुंभ कल्‍प में तीन को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद तो चार को पहुंचेंगे प्रदीप मिश्रा

Rajim Kumbh Kalp 2024: प्रदेश की धर्मस्व नगरी में आयोजित राजिम कुंभ कल्प में तीन मार्च को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, शंकराचार्य रविंद्र केश्वानंद, देवी मंदिर के महंत और श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद महाराज, महामंडेश्वर योगीराज स्वामी, ज्ञान स्वरूपानंद अक्रिय, वृंदावन आश्रम के प्रेमानंद महाराज पहुंचेंगे। वहीं, पंडित प्रदीप मिश्रा चार मार्च को कुंभ में आएंगे। मध्यप्रदेश के गुरुशरण शर्मा पंडोखर सरकार भी राजिम पहुंचेंगे। इन्हें न्यौता दिया गया है, जिसपर उन्होंने सहमति दे दी है। राजिम कुंभ कल्प मेला में तीन मार्च से विराट संत-समागम का शुभारंभ होगा। आठ मार्च तक चलने वाले इस समागम में हरिद्वार, प्रयागराज, काशी, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, अमरकंटक, चित्रकूट, उत्तराखंड आदि स्थानों से बड़ी संख्या में साधु-संतों का आगमन होगा। राजिम कुंभ में स्थानीय कलाकारों की ओर से लगातार कार्यक्रमों का आयोजन करके भक्तिमय माहौल बनाया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने इस तरह से कार्यक्रमों का आयोजन किया है कि हर दिन भगवान राम से जुड़े हुए दो से चार कार्यक्रमों हो रहे हैं। आठ मार्च को होगा शाही स्नान राजिम कुंभ में 24 फरवरी को माघ पूर्णिमा के दिन शाही स्नान होने के बाद दूसरा चार मार्च जानकी जयंती के दिन होगा। तीसरा स्नान आठ मार्च को शिवरात्रि के दिन होगा। यही शाही स्नान होगा।

Rajim Kumbh Kalpa 2024 मोदी की गारंटी और विष्णु का सुशासन थीम पर लगाई गई है राजिम कुंभ में प्रदर्शनी

Rajim Kumbh Kalpa 2024 मोदी की गारंटी और विष्णु का सुशासन थीम पर लगाई गई है राजिम कुंभ में प्रदर्शनी

Rajim Kumbh Kalpa 2024: राजिम कुंभ कल्प 2024 मेला में लोगों को शासकीय योजनाओं की जानकारी देने जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई है। प्रदर्शनी से मेला आगंतुकों को एक ही स्थान पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी सरल और सुलभ तरीके से मिल रही है। प्रदर्शनी को मोदी की गारंटी और विष्णु का सुशासन थीम पर आकर्षक रूप से सजाया गया है। मेला आने वाले लोग प्रदर्शनी डोम में विभिन्न योजनाओं की जानकारी एलईडी में देख पा रहे है। एलईडी डिस्प्ले से वीडियो के माध्यम से योजनाओं के बारे में बताया जा रहा है। जनसंपर्क विभाग की प्रदर्शनी स्थल में प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री साय के छायाचित्र के साथ फोटो खींचाकर तत्काल निशुल्क मोबाइल में प्राप्त करने की भी सुविधा उपलब्ध है। Rajim Kumbh Kalpa 2024 लोग बड़ी संख्या में आकर योजनाओं की जानकारी लेने के साथ पीएम और सीएम के साथ फोटो खिंचवा रहे है। मेला आगंतुक प्रदर्शनी स्थल में शासन द्वारा 18 लाख परिवारों के आवास स्वीकृति, महतारी वंदन योजना के तहत विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता, रामलला दर्शन योजना, तेंदूपत्ता का खरीदी दर 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए प्रति मानक बोरा, 50 लाख से अधिक नल जल कनेक्शन, युवा शक्ति को शासन द्वारा पुलिस भर्ती में दिए गए आयु सीमा में छूट एवं सीजीपीएससी में अनियमितताओं के संबंध में सीबीआई जांच का निर्णय आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर रहे है। साधु संत भी पहुंच रहे प्रदर्शनी स्थल तक- राजिम कुंभ कल्प में देशभर से साधु संतो का आगमन शुरू हो गया है। आगंतुक संत जन मेला स्थल का भ्रमण करने के साथ जनसंपर्क प्रदर्शनी स्थल तक भी पहुंच कर योजनाओं के बारे में जानकारी ले रहे है। साथ ही राजिम मेला को पुनः राजिम कुंभ कल्प के रूप में आयोजित करने के लिए सरकार की प्रशंसा भी कर रहे है। इसी तारतम्य में सिद्धिविनायक आश्रम से आए साधुओं ने प्रदर्शनी स्थल में आकर योजनाओं की जानकारी ली। साथ ही सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रशंसा भी की। इसी प्रकार रानीपरतेवा से आए ग्रामीण श्री मिथलेश सेन ने शासन द्वारा 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति की जानकारी ली।

Rajim Kumbh Mela 2024: राजिम कुंभ मेले का आगाज, आखिर क्यों है इतना खास? इन जगहों से पहुंचना होगा आसान

Rajim Kumbh Mela 2024: राजिम कुंभ मेले का आगाज, आखिर क्यों है इतना खास? इन जगहों से पहुंचना होगा आसान

Rajim Kumbh Mela 2024: भारत के चार शहरों प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में प्रत्येक चार वर्ष में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है और हर 12 वर्ष बाद महाकुंभ सजता है। इन मेलों में देश दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले स्थित पवित्र त्रिवेणी संगम पर भी राजिम कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 24 फरवरी यानी आज माघ पूर्णिमा से मेले की शुरुआत हो चुकी है। 15 दिन तक चलने वाले इस मेले में देश के कोने-कोने से साधु-संत और नागा साधु पहुंचे हैं। आयोजकों के मुताबिक, महाशिवरात्रि तक मेला गुलजार रहेगा। आइये जानते हैं, इस खास आयोजन का क्या महत्व है और यहां पहुंचने का सबसे आसान रास्ता क्या है? छत्तीसगढ़ का प्रयाग छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाला राजिम धर्म, अध्यात्म, परंपरा और संस्कृति का संगम है। राजिम में तीन नदियों का संगम है, लिहाजा इसे भी त्रिवेणी संगम के नाम से लोग पुकारते हैं। राजिम कुंभ कल्प का आगाज शनिवार को त्रिवेणी संगम में हो चुका है। माघ पूर्णिमा से 15 दिन यानी 8 मार्च महाशिवरात्रि तक अनवरत चलने वाले इस मेले में देश दुनिया के कोने से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और साधु संत महानदी, पैरी और सोंढूर नदी के संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इस आयोजन को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। भगवान जगन्नाथपुरी से जुड़ा है महत्व आयोजकों के मुताबिक, मेले की शुरुआत कल्पवास से होती है। पखवाड़े भर श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा करते हैं। श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा के दौरान पटेश्वर, फिंगेश्वर, ब्रम्हनेश्वर, कोपेश्वर और चम्पेश्वर नाथ का पैदल भ्रमण कर धुनी रमाते हैं। जानकारी के मुताबिक, 101 किमी माघी पुन्नी मेले सहित भगवान राजीव लोचन और श्री कुलेश्वर नाथ महादेव जी के दर्शन किये जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथपुरी की यात्रा तब तक पूरी नहीं होती जब तक राजीव लोचन और श्री कुलेश्वर नाथ महादेव जी के दर्शन नहीं कर लिए जाते। यही कारण है कि इस मेले का खास महत्व है। इन जगहों से पहुंच सकते हैं आप राजिम मेले से 43 किलोमीटर की दूरी पर रायपुर शहर है। अगर, हवाई यात्रा से आप जाना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट सबसे नजदीक है। इसके अलावा राजिम रेलवे स्टेशन मेले से करीब है, लिहाजा आप ट्रेनों के जरिए भी यहां पहुंच सकते हैं। रेलवे स्टेशन से ऑटो टैक्सी और बस के जरिए मेला पहुंचने में आपको एक घंटे का समय लग सकता है।

Rajim Kumbh Mela 2024: राजिम कुंभ मेले का शुभारंभ, जानिए इससे जुड़े सभी तथ्य

Rajim Kumbh Mela 2024: राजिम कुंभ मेले का शुभारंभ, जानिए इससे जुड़े सभी तथ्य

रायपुर। छत्‍तीसगढ़ की तीर्थ नगरी राजिम में आज शनिवार को राजिम कुंभ का शुभारंभ हो गया। कुंभ कल्प में भारत की सनातन परंपरा की अद्भुत झलक दिखेगी। उत्तराखंड से तमिलनाडू तक भारतभूमि की संतपरंपरा से जुड़े संतों का अद्भुत समागम होगा। संगम नगरी का दृश्य अयोध्या धाम की तरह होगा, इस बार की थीम रामोत्सव है। बता दें कि, गरियाबंद में आस्था और अध्यात्म का पर्व माघ पूर्णिमा के पुण्य अवसर पर शनिवार की तड़के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पुन्नी स्नान के पुण्य लाभ प्राप्त किया। इसी के साथ राजिम कुंभ कल्प मेला का भी शुभारंभ हो गया। आज माघ पूर्णिमा के अवसर पर अचंल सहित प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम पैरी सोढ़ूर और महानदी में तड़के सुबह से डुबकी लगाकर अपने आप को धन्य किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ राजीव लोचन और कुलेश्वरनाथ महादेव के मंदिर पहुंचकर दर्शन कर अपने परिवार की खुशहाली और सुख समृद्धि की कामना की। आठ मार्च को होगा समापन: बता दें कि, सरकार बदलने के साथ ही छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक धार्मिक नगरी राजिम कुंभ कल्प मेले का स्वरूप भी इस बार बदला हुआ है। छत्तीसगढ़ के प्रयागराज तीर्थ नगरी राजिम में इस वर्ष राजिम माघी पुन्नी मेला की जगह राजिम कुंभ कल्प मेला का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 24 फरवरी से 08 मार्च तक होगा। इसके अंतर्गत संत समागम का आयोजन 03 मार्च से 08 मार्च तक रहेगा। इस दौरान तीन पर्व स्नान 24 फरवरी माघ पूर्णिमा, 04 मार्च जानकी जयंती और 08 मार्च महाशिवरात्रि को होगा। छत्तीसगढ़ का प्रयाग है राजिम: आपको बता दें कि, राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहते हैं। राजिम धर्म, अध्यात्म, परंपरा और संस्कृति का संगम है। वैसे यह तीन नदियों का भी संगम है, जिसके चलते इसे त्रिवेणी संगम के नाम से भी जाना जाता है। यहां महानदी, पैरी नदी और सोंढूर ये नदी मिलती है, जिसमें डुबकी लगाने ना सिर्फ हमारे देश से बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। ये वही जगह है जहां भगवन राम माता सीता के वनवास के दौरान माता सीता ने भगवान शंकर की आराधना की थी। और नदी के बीचों-बीच एक रेत का शिवलिंग बनाया था। तीन नदियों के संगम के बावजूद ये स्थान आज भी आठवीं सदी का कुलेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। जबकि यहां कितने बार बाढ़ आ चूका है, लेकिन ये मंदिर अभी तक नहीं डूबा है।

राजिम कुंभ कल्प मेला: संगम में बस रहा अस्थाई शहर, हजारों साधु संत और नागा होंगे शामिल; कल्पवाश से होगी शुरुआत

राजिम कुंभ कल्प मेला: संगम में बस रहा अस्थाई शहर, हजारों साधु संत और नागा होंगे शामिल; कल्पवाश से होगी शुरुआत

Rajim Kumbh Kalpa Mela: Temporary city being settled in Sangam, thousands of sages, saints and Nagas will participate; Will start with Kalpvaash छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित पवित्र धार्मिक नगरी त्रिवेणी संगम राजिम में प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक 15 दिनों का मेला लगता है। राजिम में तीन नदियों का संगम है, इसलिए इसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है। यहां मुख्य रूप से तीन नदियां बहती हैं, जिनके नाम क्रमशः महानदी, पैरी नदी और सोंढूर हैं। संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव जी विराजमान हैं। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2001 से राजिम मेले को राजीव लोचन महोत्सव के रूप में मनाया जाता था। वर्ष 2005 से इसे और भव्य रूप के साथ राजिम कुंभ कल्प मेला के रूप में मनाया जा रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन धर्मस्व एवं पर्यटन विभाग एवं स्थानीय आयोजन समिति के तत्वाधान में होता है। मेला की शुरुआत कल्पवाश से होती है। पखवाड़े भर पहले से श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा प्रारंभ कर देते हैं। पंचकोशी यात्रा में श्रद्धालु पटेश्वर, फिंगेश्वर, ब्रम्हनेश्वर, कोपेश्वर तथा चम्पेश्वर नाथ के पैदल भ्रमण कर दर्शन करते है तथा धुनी रमाते है। 101 किमी की यात्रा का समापन होता है और माघ पूर्णिमा से मेला का आगाज होता है। राजिम कुंभ कल्प मेला में विभिन्न जगहों से हजारों साधु-संतो का आगमन होता है। प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में नागा साधु सहित अन्य संत आदि आते हैं और विशेष पर्व स्नान तथा संत समागम में भाग लेते हैं। प्रतिवर्ष होने वाले इस मेला में विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और भगवान श्री राजीव लोचन व श्री कुलेश्वर नाथ महादेव जी के दर्शन कर अपना जीवन धन्य मानते हैं। लोगों में मान्यता है की भगवान जगन्नाथपुरी जी की यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक भगवान श्री राजीव लोचन तथा श्री कुलेश्वर नाथ के दर्शन नहीं कर लिए जाते। राजिम कुंभ कल्प मेला का अंचल में अपना एक विशेष महत्व है। राजिम अपने आप में एक विशेष महत्व रखने वाला एक छोटा सा शहर है। राजिम गरियाबंद जिले की एक तहसील है। प्राचीन समय से राजिम अपने पुरातत्वों और प्राचीन सभ्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। राजिम मुख्य रूप से भगवान श्री राजीव लोचन जी के मंदिर के कारण प्रसिद्ध है। राजिम का यह मंदिर आठवीं शताब्दी का है। यहां कुलेश्वर महादेव जी का भी मंदिर है, जो संगम स्थल पर विराजमान है। राजिम में यह मेला प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलता है। इस दौरान प्रशासन द्वारा विविध सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। स्थानीय ब्राह्मणों ने शासन को धरना प्रदर्शन की दी चेतावनी राजिम कुंभ कल्प 2024 का प्रधान धार्मिक उत्सव महानदी महाआरती का आजपर्यंत तक दिशानिर्देश एवं कार्यादेश शासन द्वारा जारी नहीं करने पर स्थानीय ब्राह्मणों मे काफी रोष की स्थिति निर्मित हो गई है। जिस कारण आज गायत्री मंदिर राजिम में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल एवं स्थानीय ब्राह्मणों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। स्थानीय ब्राह्मणों ने संयुक्त रूप से विज्ञप्ति जारी कर यह कहा कि पिछले डेढ़ महीने से माननीय बृजमोहन अग्रवाल जी एवं जिला प्रशासन को विधिवत आवेदन प्रस्तुत करने के उपरांत भी आज पर्यंत तक स्थानीय विप्र समिति के नाम से गंगा महाआरती हेतु कार्यादेश जारी नहीं किया गया है जो अत्यंत ही दुर्भाग्यजनक एवं चिंतन का विषय है। विदित हो,कि पिछले पंचवर्षीय कांग्रेस कार्यकाल में स्थानीय ब्राह्मणों के द्वारा ही महानदी महाआरती को अत्यंत ही मौलिकता पूर्ण वैदिक मंत्रों के साथ मुखर होकर संगीतबद्ध आरती की गई है, जिसकी भूरि- भूरि प्रशंसा तत्कालीन मुख्यमंत्री से लेकर सोशल मीडिया एवं सामान्यजन करते आए हैं, श्री राजीव लोचन मंदिर के पुरोहित एवं स्थानीय विप्र समिति के उपाध्यक्ष पं. विजय शर्मा ने बताया कि ऋग्वेद के मंत्रसंहिता, आचारदीपक, कर्मकांडभास्कर धर्मग्रंथो के अनुसार पूजन विधान में प्रत्यक्ष एवं मुखर वैदिक ऋचाओं का वाचन ही उचित एवं श्रेष्ठ माना गया है। बजरंग दल के जिला मठ मंदिर प्रमुख पंडित ऋषि तिवारी ने भी बताया कि काशी, हरिद्वार जैसे महान तीर्थ स्थलों में भी गंगा महाआरती मुखर एवं प्रत्यक्ष रूप से की जाती है। और उसी विधान का पालन करते हुए हम सभी राजिम एवं नवापारा के स्थानीय ब्राह्मण पिछले 5 वर्षों से एवं वर्ष भर होने वाले महापर्वों में मौलिकता पूर्ण मुखर आरती करते आए हैं।