राजिम कुम्भ कल्प 2026 की पवित्रता बनाए रखने 15 फरवरी तक मांस-मटन और शराब प्रतिबंधित

छत्तीसगढ़ की पावन त्रिवेणी संगम भूमि पर आयोजित होने वाला राजिम कुम्भ कल्प मेला 2026 धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक मर्यादाओं का प्रतीक माना जाता है। माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक आयोजित होने वाले इस 15 दिवसीय महापर्व में प्रदेश सहित देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की आस्था, सुविधा और मेला क्षेत्र में पवित्र वातावरण बनाए रखने को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने सख्त एवं महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। गरियाबंद कलेक्टर बी.एस. उइके द्वारा जारी आदेश के अनुसार राजिम कुम्भ कल्प मेला 2026 की संपूर्ण अवधि, अर्थात 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक राजिम क्षेत्र में मांस-मटन की बिक्री एवं पशुवध गृहों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह निर्णय मेला क्षेत्र में धार्मिक शुचिता, सामाजिक समरसता और शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि राजिम मेला क्षेत्र में संचालित सभी प्रकार की मांसाहारी दुकानों को इस अवधि में पूर्णतः बंद रखा जाएगा। इसके साथ ही किसी भी प्रकार के पशुवध अथवा मांस विक्रय की गतिविधि पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने पुलिस एवं राजस्व अमले को निर्देशित किया है कि मेला अवधि के दौरान सतत निगरानी रखी जाए और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन का कहना है कि राजिम कुम्भ कल्प केवल एक मेला नहीं, बल्कि श्रद्धा और साधना का महापर्व है, जहां देशभर से साधु-संत, श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी पहुंचते हैं। ऐसे में मेला क्षेत्र में पवित्र और सात्विक वातावरण बनाए रखना शासन-प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। 1 से 15 फरवरी तक शुष्क दिवस घोषित राजिम कुम्भ कल्प मेला 2026 के दौरान प्रदेश शासन ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए नवापारा (रायपुर), मगरलोड (धमतरी) एवं राजिम (गरियाबंद) क्षेत्र को लगातार 15 दिनों के लिए शुष्क दिवस घोषित किया है। जारी आदेश के अनुसार 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक इन क्षेत्रों में सभी प्रकार की देशी एवं विदेशी मदिरा की खुदरा दुकानें पूर्णतः बंद रहेंगी। इसके अंतर्गत रेस्टोरेंट-बार, होटल-बार, क्लब, भांग एवं भांगघोटा की दुकानें भी इस अवधि में संचालित नहीं की जाएंगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस दौरान न तो किसी प्रकार की मदिरा का विक्रय किया जा सकेगा और न ही किसी स्थान पर परोसा जा सकेगा। यह प्रतिबंध सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों पर समान रूप से लागू रहेगा, चाहे वह उच्च श्रेणी के होटल हों, क्लब हों अथवा गैर-मालिकाना रेस्टोरेंट। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मेला अवधि के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा मदिरा का व्यक्तिगत भंडारण भी प्रतिबंधित रहेगा। गैर-लाइसेंसी परिसरों में शराब पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अवैध मदिरा पर रोक के लिए विशेष अभियान राज्य शासन द्वारा अवैध मदिरा के परिवहन, भंडारण एवं बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके तहत राज्य स्तरीय उड़नदस्ता, संभागीय उड़नदस्ता रायपुर तथा जिला आबकारी विभाग गरियाबंद की टीमें सक्रिय की गई हैं। ये टीमें मेला अवधि के दौरान संभावित क्षेत्रों, वाहनों, दुकानों एवं संदिग्ध स्थानों की नियमित जांच करेंगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध मदिरा से संबंधित किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मेला क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए पुलिस, राजस्व एवं आबकारी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करेंगे। श्रद्धालुओं और नागरिकों से सहयोग की अपील जिला प्रशासन ने राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 में आने वाले श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे धार्मिक पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध शराब, भांग या मांसाहारी पदार्थों की बिक्री बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसी भी प्रतिष्ठान द्वारा नियमों की अवहेलना करने पर दुकान सील करने, लाइसेंस निरस्त करने एवं आर्थिक दंड सहित अन्य कठोर कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने आमजन से आग्रह किया है कि यदि कहीं भी प्रतिबंध का उल्लंघन होता दिखाई दे, तो तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। परंपरा और मर्यादा का निर्वहन राजिम कुंभ कल्प मेला छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख और प्रतिष्ठित धार्मिक आयोजन है, जहां महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु स्नान, दर्शन एवं साधना के लिए पहुंचते हैं। मेले के दौरान साधु-संतों, श्रद्धालुओं और यात्रियों की बड़ी संख्या में आवाजाही होती है। धार्मिक मर्यादा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक वातावरण को बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र को मदिरा एवं मांसाहारी उत्पादों से मुक्त रखने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। प्रशासन द्वारा जारी यह सख्त आदेश उसी परंपरा के संरक्षण और श्रद्धालुओं की भावनाओं के सम्मान की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजिम कुम्भ कल्प 2026 को शांतिपूर्ण, पवित्र और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

राजिम कुम्भ के मुख्य मंच पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सजीव झलक

पवित्र त्रिवेणी संगम की धरती पर आयोजित राजिम कुम्भ कल्प मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं के सशक्त प्रदर्शन का भी मंच बन रहा है। मेला में मुख्य मंच पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की भव्य, मनोहारी और जीवंत झलक देखने को मिली। देश-प्रदेश से आए श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय दर्शकों के बीच प्रस्तुत कार्यक्रमों ने छत्तीसगढ़ की लोककला, शास्त्रीय नृत्य, लोकसंगीत और पारंपरिक विधाओं को नई पहचान प्रदान की। मुख्य मंच पर कार्यक्रमों की शुरुआत इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की पीएचडी शोधार्थी सुश्री लीली चौहान की कथक नृत्य प्रस्तुति से हुई। उन्होंने कथक नृत्य की शास्त्रीय गरिमा को सधे हुए भाव, लय और मुद्राओं के माध्यम से मंच पर जीवंत किया। विभिन्न प्रसंगों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कथक की सूक्ष्म भाव-भंगिमाओं और तालबद्ध गतियों का प्रभावी प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और प्रत्येक भावपूर्ण प्रस्तुति पर पंडाल तालियों की गूंज से भर उठा। शास्त्रीय नृत्य की इस सशक्त शुरुआत ने पूरे सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए एक सुस्पष्ट और गरिमामय वातावरण निर्मित किया। साथ ही लोकप्रयाग मंच की झमाझम प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। लोकप्रयाग के कलाकारों ने अपनी पहली प्रस्तुति में मां जगदंबा का स्मरण करते हुए “मोर दंतेश्वरी महामाई” गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को बस्तर अंचल की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था से जोड़ते हुए मंच से ही उनके दर्शन का आध्यात्मिक अनुभव कराया। लोकगीत की सादगी और कलाकारों की भावनात्मक अभिव्यक्ति ने श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में छत्तीसगढ़ के राजकीय गीत “अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार” की प्रस्तुति ने पूरे पंडाल में प्रदेश के प्रति गर्व और आत्मीयता का भाव जागृत किया। गीत के माध्यम से छत्तीसगढ़ की नदियों, प्रकृति और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर चित्रण किया गया, जिसे दर्शकों ने खड़े होकर तालियों के साथ सराहा। इसके बाद “आगे बड़ी माटी मोर भुइयां…” जैसे गीतों ने किसानों, मिट्टी और श्रम से जुड़ी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की जड़ों को मंच पर उकेरा। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान ग्रामीण जीवन, कृषि परंपराओं और लोकसंवेदनाओं की ओर आकृष्ट किया। लोकप्रयाग के कलाकारों ने प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गीत “सास गारी दीहि…” की प्रस्तुति से एक बार फिर लोकसंगीत का जादू बिखेरा। गीत की लय और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की संगति पर दर्शक भावविभोर नजर आए। विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा कलाकारों द्वारा विलुप्त होती लोकविधाओं जैसे बांसगीत और जय गंगान की प्रस्तुति। इन दुर्लभ लोकविधाओं को मंच पर प्रस्तुत कर कलाकारों ने न केवल उन्हें पुनर्जीवित करने का सराहनीय प्रयास किया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में “मोर छत्तीसगढ़ हे महान, जिहां बसे राजिम धाम…” गीत की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को उत्साह और गर्व से भर दिया। इस गीत पर पूरा पंडाल राजिम धाम की जय-जयकार से गूंज उठा। इसके साथ ही आदिवासी अंचलों में प्रचलित पारंपरिक नृत्यों की सशक्त प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक आभूषण और तालबद्ध नृत्य ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी कलाकारों का सम्मान प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कलाकारों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपराओं और कला को संरक्षित एवं संवर्धित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजिम कुंभ कल्प के मुख्य मंच पर प्रस्तुत यह सांस्कृतिक संध्या न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी, बल्कि छत्तीसगढ़ी अस्मिता, संस्कृति और गौरव का प्रभावी संदेश भी देने में सफल रही।

राजिम कुम्भ कल्प 2026: संस्कृति, संस्कार और समृद्धि का जीवंत महोत्सव

छत्तीसगढ़ की पुण्यभूमि राजिम में आयोजित राजिम कुम्भ कल्प 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों का भव्य उत्सव है। महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर साकार होता यह महाकुंभ श्रद्धा, साधना और संस्कृति का अद्भुत संगम बन चुका है। इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण इसका सांस्कृतिक मंच है, जहाँ देशभर के कलाकार अपनी कला के रंग बिखेर रहे हैं। सांस्कृतिक मंच पर लोक कला का उत्सव राजिम कुम्भ कल्प 2026 के दौरान प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात्रि 10 बजे तक राष्ट्रीय एवं आंचलिक कलाकारों द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियाँ दी जा रही हैं। वहीं मुख्य मंच पर सायं 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक निरंतर सांस्कृतिक आयोजन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। यह मंच न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त माध्यम भी बन रहा है। एक मंच, अनेक परंपराएँ इस महोत्सव की विशेषता यह है कि यहाँ राष्ट्रीय और आंचलिक परंपराओं की झलक एक ही मंच पर देखने को मिलती है। भरतनाट्यम, कत्थक और ओडिशी जैसे शास्त्रीय नृत्यों से लेकर छत्तीसगढ़ की पहचान पंथी नृत्य, राउत नाचा और सुवा नृत्य तक, हर प्रस्तुति दर्शकों को भारतीय संस्कृति की विविधता से परिचित कराती है। रामलीला, रामायण पाठ और महाभारत आधारित नाट्य प्रस्तुतियाँ धार्मिक चेतना को और गहराई प्रदान करती हैं। कलाकारों को मिला सशक्त मंच राजिम कुम्भ कल्प 2026 कलाकारों के लिए एक सशक्त और सम्मानजनक मंच साबित हो रहा है। यहाँ न केवल प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं, बल्कि स्थानीय और आंचलिक कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का भरपूर अवसर मिल रहा है। इस वर्ष 225 आंचलिक और 30 विविध देशव्यापी प्रस्तुतियाँ इस सांस्कृतिक मंच की शोभा बढ़ा रही हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। लोक विधाओं की अनूठी छटा स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों में पंडवानी, मानस गान, जगराता, जसगीत जगराता, रामधुनी, जस झांकी, सुगम गायन, सतनाम मंगल भजन, फाग मंडली और लोक कला मंच जैसी विधाएँ शामिल हैं। इसके साथ ही भरथरी गायन, बांसुरी वादन और हास्य प्रस्तुतियाँ भी दर्शकों के बीच विशेष लोकप्रियता प्राप्त कर रही हैं। ये सभी प्रस्तुतियाँ छत्तीसगढ़ की लोक आत्मा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं। संस्कृति से समृद्धि की ओर राजिम कुम्भ कल्प 2026 यह संदेश देता है कि संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की दिशा भी है। यह आयोजन कलाकारों को रोजगार, पहचान और सम्मान प्रदान करने के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई ऊँचाइयों तक ले जा रहा है। श्रद्धालु, पर्यटक और कला प्रेमी, सभी के लिए यह महोत्सव एक अविस्मरणीय अनुभव बन रहा है। राजिम कुम्भ कल्प 2026 संस्कृति, संस्कार और समृद्धि का ऐसा प्रतीक है, जहाँ आस्था और कला एक-दूसरे में घुलकर भारत की आत्मा को अभिव्यक्त करती हैं। यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक चेतना को एक सूत्र में पिरोने का सफल प्रयास है। आने वाले दिनों में भी यह कुम्भ कल्प अपनी सांस्कृतिक गरिमा और कलात्मक वैभव से जनमानस को प्रेरित करता रहेगा।

मुंबई की “लीला द स्पिरिचुअल रॉक बैंड” ने दी सुमधुर भजनों की प्रस्तुति

कुम्भ में प्रतिदिन राष्ट्रीय एवं आंचलिक कलाकार दे रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां छत्तीसगढ़ की पावन त्रिवेणी संगम भूमि पर स्थित राजिम में राजिम कुंभ कल्प 2026 का भव्य शुभारंभ हो चुका है। महानदी, पैरी और सोंढुर नदियों के संगम पर आयोजित यह महापर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक ऊर्जा का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। राजिम कुंभ कल्प 2026 में देशभर से संत, श्रद्धालु, कलाकार और धर्मप्रेमी सहभागिता कर रहे हैं, जिससे यह आयोजन एक व्यापक सांस्कृतिक महाकुंभ का स्वरूप ले चुका है। राजिम कुंभ कल्प 2026 का शुभारंभ 1 फरवरी को पवित्र महानदी आरती के साथ हुआ। आरती के दौरान संगम तट पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहां दीपों की पंक्तियां और मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। शुभारंभ समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने की। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, संतगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। राजिम कुंभ कल्प 2026 में आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया गया है। आयोजन के माध्यम से राष्ट्रीय और आंचलिक कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन का सशक्त मंच प्रदान किया जा रहा है। नए मेला स्थल पर उद्घाटन समारोह के उपरांत 1 फरवरी की संध्या मुंबई की प्रसिद्ध लीला द स्पिरिचुअल रॉक बैंड ने अपनी सुमधुर और भक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रॉक संगीत और आध्यात्मिक भजनों का यह अनूठा संगम दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कुंभ कल्प के दौरान प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात्रि 10 बजे तक राष्ट्रीय एवं आंचलिक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की निरंतर श्रृंखला संचालित की जा रही है। मुख्य मंच पर प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक कत्थक, पंथी, ओडिशी, भरतनाट्यम, रामलीला, हास्य प्रस्तुति, जसगीत जगराता, भरथरी, बांसुरी वादन सहित विविध शास्त्रीय एवं लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित हो रही हैं। ये कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। राजिम कुंभ कल्प 2026 में स्थानीय कलाकारों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। कुल 225 सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं को मंच प्रदान किया जा रहा है। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक पंडवानी, मानस गान, जगराता, पंथी, रामधुनी, जस झांकी, रामायण पाठ, सुगम गायन, सतनाम मंगल भजन, फाग मंडली, लोक कला मंच, राउत नाचा एवं सुवा नृत्य जैसी लोक विधाओं की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा से परिचित करा रही हैं। राजिम कुंभ कल्प 2026 का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सनातन संस्कृति, लोक कला, परंपरागत मूल्यों और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना भी है। यह आयोजन श्रद्धालुओं के मन, विचार और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करने का कार्य करेगा। साथ ही, यह छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत करेगा। राजिम कुंभ कल्प 2026 आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का ऐसा अनुपम संगम है, जो आने वाले दिनों में देशभर के श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के लिए प्रेरणा और अनुभूति का केंद्र बनेगा।

राजिम कुम्भ कल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर का प्रतीकः राज्यपाल श्री रमेन डेका

त्रिवेणी संगम राजिम के पावन तट स्थित नवीन मेला मैदान में आयोजित राजिम कुम्भ कल्प मेला 2026 के भव्य शुभारंभ अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महामहिम श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, अन्य अतिथियों एवं संत-महात्माओं ने भगवान श्री राजीवलोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। शुभारंभ अवसर पर अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि महानदी, पैरी एवं सोंढूर नदियों के पवित्र संगम पर स्थित राजिम की भूमि अत्यंत पुण्य, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि इस पावन स्थल पर आयोजित राजिम कुम्भ कल्प मेला, जिसे श्रद्धालु ‘कल्प कुम्भ’ के नाम से जानते हैं, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि राजिम कुम्भ कल्प के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता एवं गौरव का अनुभव हो रहा है। छत्तीसगढ़ की पवित्र नगरी राजिम में कुम्भ मेला स्थल पर आकर उन्हें विशेष शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे साधु-संतों, विद्वानों एवं श्रद्धालुजनों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कुलेश्वर महादेव, भगवान श्री राजीवलोचन एवं राजिम भक्ति माता से देश-प्रदेश की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की। राजिम छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक राज्यपाल ने कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक है। यह पावन आयोजन न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। राजिम प्राचीन काल से ही शैव एवं वैष्णव परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां स्थित राजीवलोचन मंदिर में भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान हैं तथा कुलेश्वर महादेव के रूप में भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। पंचकोशी यात्रा विश्वविख्यात राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि कुलेश्वरनाथ महादेव, पटेश्वर नाथ महादेव, चंपेश्वर नाथ महादेव, ब्रह्मकेश्वर नाथ, फनीकेश्वर नाथ एवं करपूरेश्वर नाथ महादेव की पंचकोशी यात्रा विश्वविख्यात है। राजिम क्षेत्र में प्राचीन मंदिरों की बहुलता इसे पुरातात्विक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट स्थान प्रदान करती है, जहां मूर्तिकला के गौरवशाली इतिहास के दर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में माघ मास को पुण्य मास माना गया है। इस पावन अवधि में पवित्र नदियों एवं त्रिवेणी संगमों में पुण्य स्नान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माघ माह में आयोजित होने वाले मेलों का विशेष सामाजिक एवं सामुदायिक महत्व है, जहां विभिन्न संस्कृतियों का संगम होता है तथा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है। राज्यपाल श्री डेका ने राजिम कुम्भ में पधारे समस्त साधु-संतों, विद्वानों एवं धर्मगुरुओं को नमन करते हुए कहा कि भारत साधु-संतों की भूमि रही है। संतों के सान्निध्य से समाज में सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान एवं नैतिक मूल्यों का संचार होता है। जहां संतों का सम्मान होता है, वहां शांति, समृद्धि और खुशहाली स्वतः स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि राजिम कुम्भ कल्प जैसे भव्य आयोजनों से पर्यटन को भी विशेष प्रोत्साहन मिलता है। श्रद्धालुओं की आस्था, संतों का आशीर्वाद एवं कलाकारों की प्रस्तुतियों ने राजिम कुम्भ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। आधुनिक युग में कला, साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता है, जिससे छत्तीसगढ़ पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभर सके। राज्यपाल ने कहा कि यह देखकर विशेष प्रसन्नता हो रही है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राजिम कुम्भ कल्प का आयोजन स्वच्छता, सुरक्षा एवं आधुनिक सुविधाओं के साथ किया जा रहा है। यह आयोजन आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ पर्यटन, लोक संस्कृति एवं सामाजिक समरसता को भी नई दिशा देगा। उन्होंने अपने उद्बोधन में पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने नदियों, सरोवरों एवं वृक्षों के संरक्षण को विशेष महत्व दिया है। आज आवश्यकता है कि हम स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण एवं माइक्रो प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक होकर अपने दायित्वों का निर्वहन करें। अंत में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने सभी साधु-संतों, धार्मिक गुरुओं एवं श्रद्धालुओं का पुनः स्वागत करते हुए कामना की कि राजिम कुम्भ कल्प 2026 छत्तीसगढ़ को आध्यात्मिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करेगा। राजिम कुम्भ ने बनाई विश्वस्तरीय पहचान इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने भगवान श्री राजीवलोचन एवं कुलेश्वर महादेव को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि राजिम कुम्भ कल्प हमारी सांस्कृतिक उत्सव परंपरा एवं लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव है, जो सामाजिक मूल्यों को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं परंपराएं आज विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं और स्थानीय परंपराओं का सम्मान अत्यंत आवश्यक है। आयुक्त श्री महादेव कावरे ने स्वागत भाषण में कहा कि त्रिवेणी संगम केवल नदियों का संगम नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास एवं सनातन संस्कृति का प्रतीक है। राजिम कुम्भ कल्प मेला सामाजिक समरसता एवं एकता का संदेश देता है। संत श्री राजीव लोचन महाराज ने कहा कि वर्ष 2006 से ‘छत्तीसगढ़ के प्रयाग’ के रूप में पहचान बना चुका राजिम कुम्भ कल्प, वर्ष 2026 में अपनी पावन परंपरा की निरंतरता को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देशभर को जोड़ने का कार्य कर रहा है। पं. युवराज पांडेय ने कहा कि नासिक, हरिद्वार, प्रयागराज एवं उज्जैन की भांति राजिम कुम्भ कल्प ने भी सम्पूर्ण भारत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर ली है और यह मेला छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इस अवसर पर राज्य गृह भंडार निगम के अध्यक्ष श्री चंदूलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गौरीशंकर कश्यप, नगर पालिका राजिम अध्यक्ष श्री महेश यादव, नगर पालिका गोबरा नवापारा अध्यक्ष श्रीमती ओमकुमारी साहू, गरियाबंद कलेक्टर श्री भगवान सिंह उईके, जिला पंचायत सीईओ श्री प्रखर चंद्राकर सहित जनप्रतिनिधिगण, साधु-संत एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

राजिम कुम्भ कल्प में होगा सामूहिक विवाह समारोह

मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना 2026 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राजिम कुम्भ कल्प में भव्य सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 10 फरवरी 2026 को प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ संपन्न होगा। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र परिवारों को सम्मानजनक, सुरक्षित और सामाजिक वातावरण में विवाह की सुविधा प्रदान करना है। 10 फरवरी 2026 को प्रदेशभर में एक साथ होगा सामूहिक विवाह छत्तीसगढ़ शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 10 फरवरी 2026 को पूरे प्रदेश में सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राज्य स्तरीय मुख्य समारोह नवीन राज्योत्सव स्थल, अटल नगर नवा रायपुर में संपन्न होगा, जहां लगभग 1,100 जोड़ों का विवाह कराया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, राज्य सरकार के मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधि गरिमामय उपस्थिति में नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और पारंपरिक स्वरूप देने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। राजिम कुम्भ कल्प में जिला स्तरीय सामूहिक विवाह समारोह गरियाबंद जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन नवीन मेला स्थल, राजिम कुम्भ कल्प में किया जाएगा। इस आयोजन में जिले के लगभग 200 संभावित जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जाएगा। राजिम कुम्भ कल्प छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। ऐसे पावन स्थल पर सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूती प्रदान करता है। सामूहिक विवाह को लेकर प्रशासन की व्यापक तैयारियां राजिम कुम्भ कल्प में आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह समारोह के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। विवाह मंडप, भोजन व्यवस्था, पंजीयन एवं दस्तावेज सत्यापन, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि नवविवाहित जोड़ों और उनके परिजनों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। वर्चुअल माध्यम से मुख्यमंत्री देंगे नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद राज्य स्तरीय समारोह के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम से आपस में जुड़े रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं मंत्रीगण सभी जिलों के नवविवाहित जोड़ों को वर्चुअल रूप से आशीर्वाद प्रदान करेंगे। यह व्यवस्था मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना को तकनीक से जोड़ने का सशक्त उदाहरण है। 3 फरवरी 2026 तक करें पंजीयन मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना 2026 के अंतर्गत विवाह के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 03 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। पात्र एवं इच्छुक परिवारों से अपील की गई है कि वे समय-सीमा के भीतर अपना पंजीयन अवश्य कराएं। पंजीयन की प्रक्रिया संबंधित जनपद पंचायत, नगरीय निकाय अथवा निर्धारित कार्यालयों के माध्यम से की जा रही है। पात्रता की जांच के उपरांत चयनित जोड़ों को सामूहिक विवाह समारोह में सम्मिलित किया जाएगा। सामाजिक समरसता और जनकल्याण का प्रतीक है यह योजना मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, सामूहिकता और समरसता को बढ़ावा देने वाली योजना है। एक ही मंच पर विभिन्न वर्गों के जोड़ों का विवाह सामाजिक एकता का सशक्त संदेश देता है। राजिम कुम्भ कल्प में सामूहिक विवाह समारोह इस योजना को धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान करता है। जिला प्रशासन ने पात्र परिवारों से अपील की है कि वे समय रहते पंजीयन कर इस जनकल्याणकारी योजना का अधिकतम लाभ उठाएं और इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनें।

आस्था का पॉडकास्ट: राजिम कुम्भ कल्प 2026 में संवाद का नया और सशक्त मंच

राजिम। छत्तीसगढ़ की पावन त्रिवेणी संगम भूमि पर आयोजित होने वाला राजिम कुम्भ कल्प 2026 न केवल धार्मिक अनुष्ठानों और संत समागम के लिए जाना जाएगा, बल्कि इस बार यह आयोजन डिजिटल संवाद और विचार-विमर्श के एक नए आयाम की भी शुरुआत करने जा रहा है। इसी उद्देश्य के तहत राजिम कुम्भ कल्प 2026 में ‘आस्था का पॉडकास्ट’ की विशेष पहल की गई है, जो आस्था, संस्कृति और संवाद को एक आधुनिक मंच प्रदान करेगा। आस्था, विचार और संवाद का संगम ‘आस्था का पॉडकास्ट’ पहल का मुख्य उद्देश्य सनातन परंपरा, धार्मिक विचारधारा और आध्यात्मिक चिंतन को डिजिटल माध्यम के जरिए व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाना है। इस मंच के माध्यम से देशभर से आने वाले ब्लॉगर, कंटेंट क्रिएटर, डिजिटल मीडिया प्रतिनिधि और स्वतंत्र पत्रकार संतों, महात्माओं एवं विशिष्ट अतिथियों से सीधे संवाद कर सकेंगे। राजिम कुम्भ कल्प में पहली बार पॉडकास्ट के लिए एक समर्पित मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जहां धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों पर गहन चर्चा की जा सकेगी। यह मंच न केवल संवाद का माध्यम बनेगा, बल्कि सनातन परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का भी सशक्त प्रयास होगा। डिजिटल युग में सनातन परंपरा की नई अभिव्यक्ति आज के डिजिटल युग में पॉडकास्ट एक प्रभावशाली माध्यम के रूप में उभरकर सामने आया है। ‘आस्था का पॉडकास्ट’ इसी माध्यम का उपयोग करते हुए राजिम कुम्भ कल्प की आध्यात्मिक ऊर्जा, संतों के विचार और धार्मिक विमर्श को देश-विदेश तक पहुंचाने का कार्य करेगा। यह पहल उन श्रद्धालुओं के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी, जो प्रत्यक्ष रूप से राजिम नहीं पहुंच पाते, लेकिन डिजिटल माध्यम से कुम्भ कल्प की अनुभूति प्राप्त करना चाहते हैं। पॉडकास्ट स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया ‘आस्था का पॉडकास्ट’ में भाग लेने के लिए इच्छुक ब्लॉगरों एवं कंटेंट क्रिएटर्स को राजिम कुम्भ की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध पॉडकास्ट लिंक पर जाकर पंजीयन करना होगा। वेबसाइट लिंक: https://rajimkumbh.in/podcast/ रजिस्ट्रेशन सेक्शन में जाकर निर्धारित फॉर्म को पूर्ण रूप से भरना अनिवार्य है। फॉर्म में निम्न जानकारी दर्ज करनी होगी— नाम मोबाइल नंबर ईमेल आईडी पूर्ण पता पंजीयन पूर्ण होने के बाद स्लॉट की पुष्टि आयोजकों द्वारा की जाएगी। नियम एवं शर्तें आस्था का पॉडकास्ट मंच सुव्यवस्थित एवं सुचारु रूप से संचालित हो, इसके लिए कुछ आवश्यक नियम एवं शर्तें निर्धारित की गई हैं। प्रत्येक ब्लॉगर को पॉडकास्ट के लिए अधिकतम एक घंटे का समय प्रदान किया जाएगा। स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगी। पॉडकास्ट के प्रचार-प्रसार हेतु पोस्टर या अन्य प्रचार सामग्री की व्यवस्था संबंधित ब्लॉगर को स्वयं करनी होगी। माइक, रिकॉर्डिंग डिवाइस एवं अन्य तकनीकी उपकरण भी ब्लॉगर को अपने साथ लाने होंगे। हालांकि, आयोजकों द्वारा पॉडकास्ट मंच की मूलभूत संरचनात्मक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। संतों और विशिष्ट अतिथियों से सीधा संवाद पॉडकास्ट के दौरान ब्लॉगर संतों, धर्माचार्यों और विशिष्ट अतिथियों के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विषयों पर संवाद कर सकेंगे। यह संवाद न केवल प्रश्नोत्तर तक सीमित रहेगा, बल्कि विचारों के आदान-प्रदान और अनुभव साझा करने का एक सशक्त मंच बनेगा। परंपरा और आधुनिकता का समन्वय राजिम कुम्भ कल्प 2026 का ‘आस्था का पॉडकास्ट’ मंच इस बात का उदाहरण है कि कैसे परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर सनातन संस्कृति को नई पहचान दी जा सकती है। यह पहल युवाओं को धर्म, संस्कृति और अध्यात्म से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आस्था का पॉडकास्ट राजिम कुम्भ कल्प 2026 की एक अभिनव और दूरदर्शी पहल है। यह मंच आस्था की आवाज को डिजिटल माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने का कार्य करेगा। संवाद, विचार और संस्कृति का यह संगम राजिम कुम्भ कल्प को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और बौद्धिक विमर्श का राष्ट्रीय मंच बनाएगा।  

राजिम कुम्भ कल्प 2026ः कला और आस्था का भव्य उत्सव

छत्तीसगढ़ की पावन त्रिवेणी संगम भूमि पर आयोजित होने वाला राजिम कुंभ कल्प 2026 इस वर्ष धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजनों के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। कुंभ कल्प के दौरान जहां एक ओर संत समागम, प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठान होंगे, वहीं दूसरी ओर देश के प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को भक्ति और संस्कृति से सराबोर करेंगी। महानदी आरती के साथ होगा भव्य शुभारंभ राजिम कुंभ कल्प 2026 का भव्य शुभारंभ 1 फरवरी को सायं 6.30 बजे पवित्र महानदी आरती के साथ किया जाएगा। महानदी के तट पर आयोजित यह आरती श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम दृश्य प्रस्तुत करेगी। दीपों की आलोकमय श्रृंखला, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होने वाली यह आरती कुंभ कल्प के आरंभ को विशेष गरिमा प्रदान करेगी। लीला द स्पिरिचुअल रॉक बैंड की सुमधुर प्रस्तुति कुंभ कल्प के उद्घाटन समारोह के पश्चात नवीन मेला स्थल में सायं 8 बजे मुंबई की प्रसिद्ध ‘लीला द स्पिरिचुअल रॉक बैंड’ अपनी सुमधुर और भक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करेगी। यह बैंड आधुनिक संगीत शैली और आध्यात्मिक भावनाओं के समन्वय के लिए जाना जाता है। भक्ति संगीत की यह प्रस्तुति युवाओं सहित सभी वर्गों के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण होगी। प्रतिदिन होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम राजिम कुंभ कल्प 2026 के दौरान श्रद्धालुओं के मनोरंजन और सांस्कृतिक अभिरुचि को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन सायं 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक राष्ट्रीय एवं आंचलिक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय लोकसंस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत और कला को सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियां श्रद्धालुओं को एक व्यापक सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेंगी। संत श्री गुरूशरण जी महाराज का दिव्य दरबार राजिम कुंभ कल्प 2026 का एक प्रमुख आध्यात्मिक आकर्षण संत श्री गुरूशरण जी महाराज (पण्डोखर सरकार) का दिव्य दरबार रहेगा। यह दिव्य दरबार 9 से 11 फरवरी तक प्रतिदिन सायं 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक आयोजित किया जाएगा। संत श्री गुरूशरण जी महाराज के सान्निध्य में श्रद्धालु आध्यात्मिक मार्गदर्शन, आशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करेंगे। उनका दिव्य दरबार कुंभ कल्प के आध्यात्मिक स्वरूप को और अधिक सुदृढ़ करेगा। विराट संत समागम और स्वाति मिश्रा की प्रस्तुति 10 फरवरी को राजिम कुंभ कल्प के अंतर्गत विराट संत समागम का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से पधारे संत-महात्मा एक मंच पर उपस्थित होकर धर्म, संस्कृति और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा करेंगे। इसी संध्या रात 8 बजे “राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी” गीत से प्रसिद्ध भजन गायिका सुश्री स्वाति मिश्रा अपनी सुमधुर भक्ति प्रस्तुति देंगी, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। महाशिवरात्रि पर भव्य समापन समारोह राजिम कुंभ कल्प 2026 का समापन महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भव्य रूप से किया जाएगा। समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सहित राज्य सरकार के समस्त कैबिनेट मंत्री उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर रात 8 बजे रामायण में प्रभु श्रीराम की भूमिका निभा चुके श्री अरूण गोविल की गरिमामय उपस्थिति आयोजन को विशेष बना देगी। उनकी सहभागिता श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से अविस्मरणीय अनुभव होगी। सनातन संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव कुल मिलाकर, राजिम कुंभ कल्प 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का विराट उत्सव होगा। संत समागम, भक्ति संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और दिव्य आयोजनों के माध्यम से यह कुंभ कल्प श्रद्धालुओं के मन, विचार और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राजिम कुम्भ में दिखेगी चार धाम यात्रा और 12 ज्योतिर्लिंगों की जीवंत झांकी

छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर स्थित त्रिवेणी संगम राजिम एक बार फिर सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनने जा रहा है। राजिम कुम्भ कल्प 2026 के भव्य आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इस महापर्व की एक प्रमुख विशेषता चार धाम यात्रा एवं देशभर में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों की जीवंत और आकर्षक झांकी होगी, जो श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर सम्पूर्ण तीर्थ दर्शन का दुर्लभ अवसर प्रदान करेगी। राजिम कुम्भ कल्प 2026 में प्रस्तुत की जाने वाली चार धाम यात्रा की झांकी के माध्यम से बद्रीनाथ, द्वारका, केदारनाथ और रामेश्वरम जैसे पावन धामों की आध्यात्मिक अनुभूति श्रद्धालु राजिम में ही कर सकेंगे। समाचार माध्यमों और धार्मिक आयोजनों से जुड़े स्रोतों के अनुसार, झांकी को इस प्रकार डिज़ाइन किया जा रहा है कि प्रत्येक धाम की स्थापत्य शैली, धार्मिक प्रतीक और आध्यात्मिक वातावरण को यथासंभव वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया जा सके। इससे उन श्रद्धालुओं को विशेष लाभ मिलेगा, जो किसी कारणवश देश के विभिन्न कोनों में स्थित इन धामों की यात्रा नहीं कर पाते। चार धाम यात्रा के साथ-साथ राजिम कुम्भ कल्प 2026 में 12 ज्योतिर्लिंगों की भव्य झांकी भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगी। काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, महाकालेश्वर, बैद्यनाथ, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर और मल्लिकार्जुन जैसे पवित्र ज्योतिर्लिंगों की प्रतीकात्मक प्रस्तुति श्रद्धालुओं को भगवान शिव की अखंड आराधना से जोड़ने का कार्य करेगी। धार्मिक समाचार पोर्टलों में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, झांकियों में शिवलिंग, मंदिर संरचना, पौराणिक कथाओं और धार्मिक प्रसंगों को दृश्य माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को गहन आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त होगी। राजिम कुम्भ कल्प आयोजन समिति द्वारा इन झांकियों को केवल सजावटी रूप तक सीमित न रखते हुए, उनके माध्यम से सनातन धर्म के दर्शन, मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को भी उजागर किया जा रहा है। विशेषज्ञ कलाकारों और शिल्पकारों द्वारा निर्मित ये झांकियां भारतीय परंपरा, लोककला और आधुनिक प्रस्तुति शैली का समन्वय होंगी। समाचारों के अनुसार, झांकियों के साथ प्रकाश, ध्वनि और दृश्य प्रभावों का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को जीवंत अनुभव प्राप्त हो सके। राजिम कुम्भ कल्प 2026 में चार धाम और 12 ज्योतिर्लिंगों की झांकी न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि यह सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी। युवा पीढ़ी को भारतीय तीर्थ परंपरा, पौराणिक महत्व और धार्मिक एकता से परिचित कराने में यह पहल प्रभावी सिद्ध होगी। धार्मिक आयोजनों पर आधारित समाचार रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार की झांकियां श्रद्धालुओं में तीर्थ स्थलों के प्रति जागरूकता और सम्मान को बढ़ावा देती हैं। राजिम कुम्भ कल्प 2026 के माध्यम से छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई मिलने की संभावना है। चार धाम यात्रा और 12 ज्योतिर्लिंगों की झांकी इस आयोजन को केवल एक मेला न बनाकर, सनातन संस्कृति के व्यापक दर्शन का मंच बना देंगी। त्रिवेणी संगम की पावन भूमि पर एक साथ इन सभी तीर्थों का दर्शन श्रद्धालुओं के लिए जीवनभर स्मरणीय अनुभव होगा। कुल मिलाकर, राजिम कुम्भ कल्प 2026 में प्रस्तुत होने वाली यह जीवंत झांकी आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का ऐसा संगम होगी, जो देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को एक सूत्र में बांधने का कार्य करेगी। यह आयोजन सनातन परंपरा की निरंतरता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगा।

राजिम कुंभ कल्प 2026 का महानदी आरती के साथ होगा शंखनाद

छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर महानदी, पैरी और सोंढुर नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित राजिम एक बार फिर सनातन आस्था, संस्कृति और परंपरा के विराट उत्सव का साक्षी बनने जा रहा है। राजिम कुंभ कल्प 2026 का आयोजन श्रद्धा, आध्यात्म और सांस्कृतिक चेतना का ऐसा संगम होगा, जो न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं को एक सूत्र में बांधेगा। यह आयोजन भारतीय सनातन परंपरा की जीवंतता, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक ऊर्जा को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करेगा। राजिम कुंभ कल्प 2026 का भव्य शुभारंभ 1 फरवरी को शाम 6.30 बजे पवित्र महानदी आरती के साथ किया जाएगा। महानदी के तट पर आयोजित होने वाली यह आरती श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य प्रस्तुत करेगी। शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और दीपों की आलोकमय श्रृंखला के बीच होने वाली महानदी आरती श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर देगी। यह क्षण न केवल धार्मिक अनुष्ठान होगा, बल्कि सनातन संस्कृति की अखंड परंपरा का प्रतीक भी बनेगा। राजिम कुम्भ कल्प 2026 का शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका करेंगे और कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल करेंगे। इस अवसर पर रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, कुरूद विधायक श्री अजय चंद्राकर, राजिम विधायक श्री रोहित साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति आयोजन को विशेष महत्व प्रदान करेगी। जनप्रतिनिधियों की सहभागिता यह दर्शाती है कि राजिम कुंभ कल्प केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का व्यापक मंच भी है।   राजिम कुंभ कल्प 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक अभिरुचि का भी विशेष ध्यान रखा गया है। कुंभ कल्प के अंतर्गत नया मेला स्थल में 1 फरवरी को उद्घाटन समारोह के पश्चात सायं 8 बजे मुंबई की प्रसिद्ध ‘लीला द स्पिरिचुअल रॉक बैंड’ अपनी सुमधुर एवं भक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करेगी। आधुनिक संगीत और आध्यात्मिक भावों का यह संगम युवाओं सहित सभी वर्गों के श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा। इसके साथ ही राजिम कुंभ कल्प के दौरान प्रतिदिन सायं 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक राष्ट्रीय एवं आंचलिक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय लोकसंस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत और कला को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा के साथ देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियां श्रद्धालुओं को एक व्यापक सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेंगी। राजिम कुंभ कल्प 2026 केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का भी कार्य करेगा। संत समागम, प्रवचन, धार्मिक संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से यह कुंभ कल्प श्रद्धालुओं के मन, विचार और जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार करेगा। त्रिवेणी संगम की पावन भूमि पर आयोजित यह महापर्व सनातन संस्कृति की निरंतरता और भारतीय जीवन दर्शन की गहराई को रेखांकित करेगा। कुल मिलाकर, राजिम कुंभ कल्प 2026 छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ करने वाला आयोजन होगा। महानदी आरती के साथ होने वाला इसका शंखनाद आस्था, संस्कृति और परंपरा की उस अखंड धारा को प्रवाहित करेगा, जो पीढ़ियों से भारतीय समाज को जोड़ती आ रही है। यह कुंभ कल्प निश्चय ही श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव सिद्ध होगा।