छत्तीसगढ़ की पावन त्रिवेणी संगम भूमि पर आयोजित होने वाला राजिम कुम्भ कल्प मेला 2026 धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक मर्यादाओं का प्रतीक माना जाता है। माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक आयोजित होने वाले इस 15 दिवसीय महापर्व में प्रदेश सहित देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की आस्था, सुविधा और मेला क्षेत्र में पवित्र वातावरण बनाए रखने को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने सख्त एवं महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
गरियाबंद कलेक्टर बी.एस. उइके द्वारा जारी आदेश के अनुसार राजिम कुम्भ कल्प मेला 2026 की संपूर्ण अवधि, अर्थात 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक राजिम क्षेत्र में मांस-मटन की बिक्री एवं पशुवध गृहों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह निर्णय मेला क्षेत्र में धार्मिक शुचिता, सामाजिक समरसता और शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि राजिम मेला क्षेत्र में संचालित सभी प्रकार की मांसाहारी दुकानों को इस अवधि में पूर्णतः बंद रखा जाएगा। इसके साथ ही किसी भी प्रकार के पशुवध अथवा मांस विक्रय की गतिविधि पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने पुलिस एवं राजस्व अमले को निर्देशित किया है कि मेला अवधि के दौरान सतत निगरानी रखी जाए और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का कहना है कि राजिम कुम्भ कल्प केवल एक मेला नहीं, बल्कि श्रद्धा और साधना का महापर्व है, जहां देशभर से साधु-संत, श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी पहुंचते हैं। ऐसे में मेला क्षेत्र में पवित्र और सात्विक वातावरण बनाए रखना शासन-प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।
1 से 15 फरवरी तक शुष्क दिवस घोषित
राजिम कुम्भ कल्प मेला 2026 के दौरान प्रदेश शासन ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए नवापारा (रायपुर), मगरलोड (धमतरी) एवं राजिम (गरियाबंद) क्षेत्र को लगातार 15 दिनों के लिए शुष्क दिवस घोषित किया है। जारी आदेश के अनुसार 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक इन क्षेत्रों में सभी प्रकार की देशी एवं विदेशी मदिरा की खुदरा दुकानें पूर्णतः बंद रहेंगी।
इसके अंतर्गत रेस्टोरेंट-बार, होटल-बार, क्लब, भांग एवं भांगघोटा की दुकानें भी इस अवधि में संचालित नहीं की जाएंगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस दौरान न तो किसी प्रकार की मदिरा का विक्रय किया जा सकेगा और न ही किसी स्थान पर परोसा जा सकेगा। यह प्रतिबंध सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों पर समान रूप से लागू रहेगा, चाहे वह उच्च श्रेणी के होटल हों, क्लब हों अथवा गैर-मालिकाना रेस्टोरेंट।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मेला अवधि के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा मदिरा का व्यक्तिगत भंडारण भी प्रतिबंधित रहेगा। गैर-लाइसेंसी परिसरों में शराब पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अवैध मदिरा पर रोक के लिए विशेष अभियान
राज्य शासन द्वारा अवैध मदिरा के परिवहन, भंडारण एवं बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके तहत राज्य स्तरीय उड़नदस्ता, संभागीय उड़नदस्ता रायपुर तथा जिला आबकारी विभाग गरियाबंद की टीमें सक्रिय की गई हैं। ये टीमें मेला अवधि के दौरान संभावित क्षेत्रों, वाहनों, दुकानों एवं संदिग्ध स्थानों की नियमित जांच करेंगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध मदिरा से संबंधित किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मेला क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए पुलिस, राजस्व एवं आबकारी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करेंगे।

श्रद्धालुओं और नागरिकों से सहयोग की अपील
जिला प्रशासन ने राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 में आने वाले श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे धार्मिक पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध शराब, भांग या मांसाहारी पदार्थों की बिक्री बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसी भी प्रतिष्ठान द्वारा नियमों की अवहेलना करने पर दुकान सील करने, लाइसेंस निरस्त करने एवं आर्थिक दंड सहित अन्य कठोर कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने आमजन से आग्रह किया है कि यदि कहीं भी प्रतिबंध का उल्लंघन होता दिखाई दे, तो तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

परंपरा और मर्यादा का निर्वहन
राजिम कुंभ कल्प मेला छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख और प्रतिष्ठित धार्मिक आयोजन है, जहां महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु स्नान, दर्शन एवं साधना के लिए पहुंचते हैं। मेले के दौरान साधु-संतों, श्रद्धालुओं और यात्रियों की बड़ी संख्या में आवाजाही होती है।
धार्मिक मर्यादा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक वातावरण को बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र को मदिरा एवं मांसाहारी उत्पादों से मुक्त रखने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। प्रशासन द्वारा जारी यह सख्त आदेश उसी परंपरा के संरक्षण और श्रद्धालुओं की भावनाओं के सम्मान की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजिम कुम्भ कल्प 2026 को शांतिपूर्ण, पवित्र और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।