राजिम की पंचकोशी यात्रा

राजिम कुंभ कल्प में पंचकोशी यात्रा का महत्व अलग ही है। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुगण शामिल होकर प्रमुख शिव मंदिरों की पदयात्रा कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। 

 

यह यात्रा राजिम त्रिवेणी संगम में स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर से आरंभ होती है और वहीं आकर समाप्त होती है।

श्रद्धालु पांच प्रमुख शिवलिंगों के दर्शन करते हुए यह यात्रा पूर्ण करते हैं। यात्रा का पहला पड़ाव पटेवा स्थित पटेश्वर महादेव मंदिर है, जो राजिम से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा अन्नब्रह्मा के रूप होती है। मान्यता है कि यहां सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। निः संतान दंपत्ति मनोकामना कर यात्रा की शुरूआत करते है।

यात्रा का दूसरा पड़ाव चंपारण स्थित चंपेश्वर महादेव मंदिर है, जो राजिम से 14 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में स्थित है, जहां स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है, जो भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी के रूप में है। इसे प्रभुवल्लभाचार्य की जन्मस्थली भी माना जाता है। सावन महीने में यहां कावडियों का तांता लगा रहता है।

तीसरा पड़ाव महासमुंद के बम्हनी स्थित ब्रम्हनेश्वर महादेव मंदिर है, जो चंपारण से 9 किलोमीटर की दूरी पर है, यहां भगवान शिव का अघोर रूप उकेरा गया है। 

यात्रा का चौथा पड़ाव है गरियाबंद के फिंगेश्वर स्थित फणीकेश्वर महादेव मंदिर, यहां शिवलिंग की ईशान रूप में पूजा की जाती है और माता अंबिका इनकी अर्धांगिनी हैं। मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु आता है, भगवान शिव उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। मान्यता यह भी है कि वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम यहां से गुजरे थे और माता सीता ने इस मंदिर में भगवान शिव का पूजा और जल अभिषेक किया था। हर साल सावन सोमवार और महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। 

 

मंदिर में अनेक प्राचीन प्रतिमाएं स्थापित है, जिनमें प्रमुख चतुर्मुखी भगवान गणेश और भैरव बाबा की प्रतिमा है। फणीकेश्वर नाथ मंदिर का निर्माण नागर शैली में हुआ है और यह मंदिर पुरातत्व विभाग द्वार संरक्षित किया गया है।

 

पांचवां और आखिरी पड़ाव है गरियाबंद के कोपरा स्थित कोपेश्वर महादेव जहां भगवान शिव वामदेव रूप में पूजे जाते हैं, और माता भवानी आनंद का प्रतीक मानी जाती हैं। इस मंदिर को इतिहासकारों ने समुद्रगुप्त काल का माना है।

यात्रा के समापन पर श्रद्धालु त्रिवेणी संगम स्थित कुलेश्वर महादेव के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।